
भोपाल। एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री पर मध्यप्रदेश सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना एंटीबायोटिक दवाएं नहीं बिकनी चाहिए। यह बात उन्होंने एम्स भोपाल के सहयोग से तैयार स्टेट एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक्शन प्लान 2.0 के शुभारंभ अवसर पर कही।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संक्रमण (इन्फेक्शन) को रोकने के लिए उपयोग में आने वाली एंटीबायोटिक दवाओं के घटते प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों ने मिलकर नए सिरे से कार्ययोजना तैयार की है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आमजन को बेहतर और सुरक्षित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर परिणाम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र की अनेक योजनाओं में उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हैं। उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।
क्यों जरूरी है एंटीबायोटिक का नियंत्रित उपयोग
विशेषज्ञों के अनुसार एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक या अधिक उपयोग करने से बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Antimicrobial Resistance) विकसित होने लगती है। इसका परिणाम यह होता है कि भविष्य में वही दवाएं संक्रमण पर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पातीं।
अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग बिना डॉक्टर की सलाह और प्रिस्क्रिप्शन के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन शुरू कर देते हैं या निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले दवा बंद कर देते हैं। इससे एंटीबायोटिक दवाओं का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और गंभीर संक्रमणों के उपचार में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग हमेशा डॉक्टर की सलाह, निर्धारित डोज और तय अवधि के अनुसार ही किया जाना चाहिए। बिना चिकित्सकीय परामर्श के इन दवाओं का उपयोग न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, बल्कि समाज में एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी गंभीर चुनौती को भी बढ़ावा देता है।