
जबलपुर। स्नान पूर्णिमा के अवसर पर वात्री साहू समाज द्वारा संचालित भगवान जगदीश स्वामी कर्मा माई शंकर भगवान मंदिर ट्रस्ट, साहू धर्मशाला गढ़ाफाटक स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं देवी सुभद्रा का विधिवत स्नान, पूजन एवं आरती संपन्न हुई। धार्मिक परंपरा के अनुसार महाभिषेक के बाद भगवान के अस्वस्थ होने की मान्यता के चलते मंदिर के कपाट 15 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। अब श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन रथयात्रा से एक दिन पूर्व, 15 जुलाई को होंगे।
ज्वरलीला की परंपरा का किया गया पालन
ट्रस्ट के सदस्य श्रीकांत साहू ने बताया कि मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी में शीतल जल से स्नान कराने के कारण भगवान जगन्नाथ को ज्वर (बुखार) आ जाता है। शास्त्रों में इसे भगवान की ‘ज्वरलीला’ कहा गया है। इस अवधि में केवल भगवान के निजी सेवक, जिन्हें ‘दयितगण’ कहा जाता है, ही उनके एकांतवास में प्रवेश कर सेवा करते हैं। इस 15 दिवसीय अवधि को ‘अनवसर’ कहा जाता है।
15 दिनों तक जड़ी-बूटी और काढ़े का लगेगा भोग
अनवसर काल के दौरान भगवान जगन्नाथ को स्वास्थ्य लाभ के लिए जड़ी-बूटी, काढ़ा, खिचड़ी, दलिया एवं फलों के रस का भोग लगाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस विशेष सेवा के बाद भगवान पूर्णतः स्वस्थ होकर पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं।
16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
श्रीकांत साहू ने बताया कि इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा 16 जुलाई को निकाली जाएगी। रथयात्रा साहू धर्मशाला, गढ़ाफाटक से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई बड़ी खेरमाई मंदिर, हनुमानताल पहुंचेगी। यात्रा के दौरान भगवान श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे तथा बड़ी खेरमाई स्थित सिंह वाहनी मंदिर में अपनी मौसी के घर विश्राम करेंगे।