
जबलपुर। अखिल भारतीय आदिवासी शबरी संघ के तत्वावधान में पूर्व मंत्री कौशल्या गोटिया के नेतृत्व में निकाली जा रही आदिवासी संस्कृति बचाओ यात्रा का चौथा दिन 11 फरवरी को कांच घर मेन रोड से प्रारंभ होकर रोशन लाल कोल के गृह निवास पर बैठक के साथ संपन्न हुआ। आज के कार्यक्रम का मुख्य विषय आदिवासी संस्कृति में “बाना” का महत्व रहा।
बाना आदिवासी समाज की शक्ति
वक्ताओं ने बताया कि “बाना” आदिवासी समाज की शक्ति, पवित्रता और आस्था का प्रतीक है। यह देवी-देवताओं को समर्पित एक पवित्र अस्त्र माना जाता है और आदिवासी समाज की प्रथम पहचान भी है। जिस घर के सामने “बाना” स्थापित होता है, वह घर आदिवासी परिवार का प्रतीक माना जाता है।
बैठक में बताया गया कि बाना धारण करने की परंपरा अत्यंत पवित्र और अनुशासित मानी जाती है। बाना वही धारण कर सकता है जो पूर्णतः शुद्ध, निर्जला व्रत का पालन करने वाला तथा “सात कुरी बाचा” धारण करने वाला हो। धार्मिक आयोजनों जैसे अष्टमी, नवमी और ज्वार विसर्जन के अवसर पर बाना छेदने की परंपरा निभाई जाती है। यह कार्य केवल “पक्का पंडा” ही कर सकता है, “कच्चा पंडा” को इसकी अनुमति नहीं होती।
परंपरा के अनुसार, बाना परिवार की विरासत के रूप में उसी सदस्य को सौंपा जाता है जो आगे चलकर परंपरा का निर्वहन करेगा। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि “सात कुरी बाचा” हल्दी-चावल की ढेरी के रूप में देवी-देवताओं का प्रतीक है। मान्यता है कि जब पक्का पंडा बाना धारण करता है तो दैवीय शक्ति का अंश उसमें प्रवेश करता है और वह भक्ति में लीन हो जाता है। धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत वह देवालय में नतमस्तक हो जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि आज भी प्राकृतिक एवं दैवीय शक्तियों में आस्था के कारण श्रद्धालु पंडा अपनी जीभ में बाना छेदकर घंटों तक धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण करते हैं। यात्रा के माध्यम से समाज को अपनी प्राचीन और गूढ़ परंपराओं से जोड़ने तथा युवा पीढ़ी को संस्कृति सहेजने के लिए प्रेरित करने का कार्य किया जा रहा है।
समस्याएं और शिकायतों पर चर्चा
बैठक में आदिवासी बस्तियों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कई बस्तियों में अवैध एवं जहरीली शराब की बिक्री खुलेआम हो रही है और इसमें पुलिस की मिलीभगत की शिकायतें हैं। आदिवासियों की रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती और उन्हें थानों से दुत्कार कर भगा दिया जाता है। इसके अलावा बेरोजगारी, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और प्रशासनिक उपेक्षा जैसी समस्याएं भी सामने रखी गईं।
ये थे उपस्थित
कार्यक्रम में भैयालाल गोटिया, रोशन लाल कोल, अशोक कुमार गोटिया, वाल्मीकि कोल, ख्याली सिंह, जितेंद्र गोटिया, विनोद गोटिया, निगा गोटिया, कमलेश कोल, आयुष कोल, अभिषेक कोल, सुनील कोल, जमुना प्रसाद कोल, मनी कोल, ज्योति गोटिया, लक्ष्मी कोल, ललित कोल, ज्योति कोल, जयंती कोल, रुद्राक्ष कोल, आयुष हैप्पी गोटिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। पूर्व मंत्री कौशल्या गोटिया ने कहा कि यह यात्रा आदिवासी संस्कृति को सहेजने और समाज की समस्याओं को शासन-प्रशासन