
जबलपुर। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत श्री गीता धाम, गौरीघाट में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तृतीय दिवस पर परम पूज्य श्रीमद् जगद्गुरु डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने भक्त शिरोमणि प्रह्लाद एवं भगवान श्रीनृसिंह के दिव्य प्राकट्य का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा कलियुग के समस्त पापों और विकारों का नाश कर जीवन का सर्वमंगल करती है।

श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान का साक्षात् वाङ्मय स्वरूप
पूज्य महाराज ने कहा कि “मंगल करनि कलिमल हरनि, तुलसी कथा रघुनाथ की” केवल श्रीरामकथा का ही नहीं, बल्कि समस्त भगवत् कथाओं का सार है। श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात् वाङ्मय स्वरूप है, जिसके श्रवण से मन, बुद्धि और आत्मा का शुद्धिकरण होता है तथा जीवन में शुभता का संचार होता है।
भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का किया वर्णन
कथाव्यास ने कहा कि भक्त प्रह्लाद का जीवन यह सिद्ध करता है कि जो व्यक्ति हर परिस्थिति में भगवान का स्मरण करता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने अनेक यातनाएँ दीं, लेकिन प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और निष्काम भक्ति को डिगा नहीं सका। अंततः भगवान श्रीनृसिंह स्तंभ से प्रकट होकर अपने भक्त की रक्षा करते हैं और अधर्म का अंत कर धर्म की स्थापना का संदेश देते हैं।
भगवान का प्रत्येक अवतार देता है धर्म का संदेश
इस अवसर पर महाराज श्री ने श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक—
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान का प्रत्येक अवतार मानवता को सत्य, धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रद्धा, समर्पण और विश्वास ही भगवान की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किया व्यासपीठ पूजन
इस अवसर पर शरद काबरा, मुन्नालाल पाण्डेय, राजेंद्र प्यासी, संतोष खम्परिया, हनुमान दास जी, बालक दास जी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन कर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त किया।
रिपोर्ट: विध्येश भापकर