
जबलपुर। आनंद की प्राप्ति हर मनुष्य चाहता है, लेकिन जीवन की आपाधापी में परमात्मा द्वारा दिए गए हर क्षण को मनुष्य सांसारिक उपलब्धियों और भौतिक सुखों को एकत्र करने में लगा देता है। जबकि वास्तविक आनंद भगवान के भजन और उनके चरणों में मन लगाने से प्राप्त होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने मनुष्य को सुख बांटना सिखाया है। सुख बांटने से बढ़ता है और दुख बांटने से कम होता है। यह विचार परम पूज्य श्रीमद् जगद्गुरु डॉ. स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने श्री गीता धाम, गौरीघाट में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के द्वितीय दिवस व्यक्त किए।
21 से 27 अगस्त तक आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह में जगतगुरु स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में हरिनाम स्मरण, भजन और सत्संग के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को यदि भगवान के भजन और चरणों में समर्पित कर दे तो उसका जीवन सुखमय और आनंदमय हो सकता है।
सुख बांटने से बढ़ता और दुख बांटने से कम होता है
जगतगुरु ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने हमें जीवन जीने के साथ-साथ दूसरों के साथ सुख-दुख बांटना भी सिखाया है। जब हम अपने सुख को दूसरों के साथ साझा करते हैं तो उसका आनंद बढ़ जाता है और जब किसी के दुख में सहभागी बनते हैं तो उसका दुख कम करने में सहायता मिलती है। इसलिए मनुष्य को केवल अपने लिए जीने के बजाय समाज और परिवार के साथ प्रेम एवं सद्भाव के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में आनंद प्राप्त करने के लिए अनेक साधन जुटाता है, लेकिन स्थायी आनंद बाहरी साधनों से नहीं मिलता। वास्तविक आनंद मन की शांति और भगवान के प्रति प्रेम में निहित है। हरिनाम का स्मरण और भगवान की भक्ति मनुष्य के मन को स्थिर करती है तथा जीवन में सकारात्मकता का संचार करती है।
भगवान के भजन में लगाएं जीवन का समय
स्वामी नृसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने कहा कि समय मनुष्य के जीवन की सबसे मूल्यवान संपत्ति है। बीता हुआ समय वापस नहीं आता। इसलिए जीवन के समय को केवल सांसारिक गतिविधियों में ही खर्च नहीं करना चाहिए, बल्कि उसका कुछ हिस्सा भगवान के भजन, स्मरण और सत्संग में भी लगाना चाहिए। भगवान के चरणों में समय लगाने से मनुष्य को आत्मिक शांति और जीवन में वास्तविक आनंद की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी भी कार्य को व्यवस्थित ढंग से करने के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार जीवन को सही दिशा देने के लिए भी आध्यात्मिक मार्गदर्शन आवश्यक है। बिना उचित मार्गदर्शन के हम अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रूप से संचालित नहीं कर सकते। संतों और गुरुजनों के मार्गदर्शन में हरिनाम स्मरण करते हुए जीवन व्यतीत करने से प्रत्येक क्षण आनंदमय बनाया जा सकता है।
हरिनाम स्मरण से जीवन में आती है शांति
जगतगुरु ने श्रद्धालुओं से कहा कि भगवान के नाम का स्मरण केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि मन को एकाग्र और शांत करने का माध्यम भी है। जब मनुष्य नियमित रूप से हरिनाम का स्मरण करता है तो उसके भीतर सकारात्मक विचारों का संचार होता है। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होती है और व्यक्ति जीवन की परिस्थितियों को अधिक सहजता से स्वीकार करने लगता है।
उन्होंने कहा कि संसार में रहते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करते रहना चाहिए, लेकिन मन को भगवान के चरणों से जोड़े रखना चाहिए। यही संतुलन जीवन को सार्थक और आनंदमय बनाने का मार्ग है। भगवान की भक्ति मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य प्रदान करती है और उसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए
श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के द्वितीय दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्य यजमान संजय वर्मा सहित राजेंद्र श्रीवास्तव, प्रशांत, कुशाग्र, आकांक्षा, अनुश्री, अदिति, अनुष्का, शकुंतला, संगीता, अपर्णा, राकेश श्रीवास्तव, योगेश श्रीवास्तव, अमित वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और श्रीमद् भागवत के आध्यात्मिक संदेशों को सुना। कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भजन एवं भगवान के नाम स्मरण के भाव में डूबे रहे।
प्रतिदिन शाम 3 बजे से हो रही कथा
नरसिंह मंदिर गीता धाम भक्त परिवार ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से श्रीमद् भागवत कथा में प्रतिदिन शाम 3 बजे से उपस्थित होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है। कथा सप्ताह 21 से 27 अगस्त तक श्री गीता धाम, गौरीघाट में आयोजित किया जा रहा है।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में शामिल होकर भगवान की भक्ति, हरिनाम स्मरण और श्रीमद् भागवत के जीवनोपयोगी संदेशों को आत्मसात करने की अपील की है।