
जबलपुर। हिंदी पखवाड़े के अवसर पर डीएन जैन महाविद्यालय में हिंदी भाषा के बदलते स्वरूप और इससे जुड़े रोजगार के अवसरों को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को हिंदी के अध्ययन के साथ तकनीकी ज्ञान और संचार क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
हिंदी के साथ डिजिटल और संचार कौशल जरूरी
कार्यशाला के मुख्य अतिथि प्रो. अरुण शुक्ल ने कहा कि किसी देश की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने में भाषा की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में हिंदी केवल साहित्य और संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के कई नए क्षेत्र विकसित हो रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बाद इन संभावनाओं में और विस्तार हुआ है। विद्यार्थियों को भाषा ज्ञान के साथ डिजिटल और संचार कौशल को भी अपनी क्षमता का हिस्सा बनाना चाहिए।
तकनीक के साथ बढ़ रहा हिंदी के प्रयोग का दायरा
विषय विशेषज्ञ डॉ. शिवकुमार व्यास ने कहा कि हिंदी भारतीय संस्कृति और विरासत की महत्वपूर्ण पहचान है। तकनीक और संचार माध्यमों के विस्तार के साथ हिंदी के प्रयोग का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से बदलते समय के अनुरूप हिंदी के साथ आधुनिक कौशल हासिल करने का आह्वान किया।
कई क्षेत्रों में बढ़ रहा हिंदी का प्रभाव
अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तरुण कुमार बाजपेयी ने कहा कि हिंदी का प्रभाव शिक्षा, प्रशासन, मीडिया, तकनीक और रोजगार सहित अनेक क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए हिंदी का व्यावहारिक ज्ञान उपयोगी साबित हो सकता है।
प्राध्यापक और विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन डॉ. एचएन मिश्रा ने किया, जबकि डॉ. शैलेश जैन ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. शिखा ताम्रकार, कु. राधा मौर्य, अनुराग नामदेव, अमित कश्यप, कुमारी रूपा कहार, सत्येंद्र शुक्ला सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।