
जबलपुर। शहर में बिजली गुल होने की समस्या के बीच उपभोक्ताओं के लिए बनाया गया 1912 ‘निदान’ टोल फ्री कॉल सेंटर खुद परेशानी का कारण बनता जा रहा है। शिकायत दर्ज कराने के लिए कॉल करने वाले उपभोक्ताओं को या तो फोन नहीं उठने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है या लाइन लगातार व्यस्त मिल रही है।
बारिश और आंधी के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होना आम बात हो गई है। ऐसे समय में उपभोक्ता 1912 कॉल सेंटर पर निर्भर रहते हैं, लेकिन यहां से समाधान नहीं मिलने के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
हर माह 62 लाख खर्च, फिर भी सेवा बेहाल
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इस कॉल सेंटर के संचालन के लिए ठेका कंपनी को हर माह 62 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया जा रहा है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है, जिससे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
2018 से शुरू सेवा, समस्याएं जस की तस
कॉल सेंटर ‘निदान’ की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। इसका संचालन मैग्नम सुपर डिस्ट्रीब्यूटर प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था। वर्ष 2023 में अनुबंध समाप्त होने के बाद भी इसी कंपनी को दोबारा ठेका दे दिया गया, जो आगामी वर्षों तक जारी रहेगा।
आंधी-बारिश में ठप पड़ी व्यवस्था
9 जून को आई तेज आंधी और बारिश के दौरान शहर में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई थी। इस दौरान हजारों उपभोक्ताओं ने कॉल सेंटर से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कई लोगों के फोन नहीं लगे और कुछ समय के लिए सेवा पूरी तरह ठप हो गई। कंपनी के अनुसार बीएसएनएल की दो लीज लाइन खराब होने के कारण यह समस्या आई थी, जिसे देर रात तक ठीक किया गया।
आंकड़ों पर भी उठे सवाल
कंपनी ने दावा किया कि एक ही दिन में 44,493 कॉल प्राप्त हुए, जिनमें से 44,070 कॉल्स का जवाब दिया गया और 24,124 शिकायतों में से 23,628 का निराकरण किया गया। हालांकि जब इन आंकड़ों का विस्तृत विवरण मांगा गया तो अधिकारी तत्काल जानकारी उपलब्ध नहीं करा सके, जिससे इन दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
अधिकारियों का पक्ष
सीजीएम एचआर संपदा सराफ ने बताया कि कॉल सेंटर में एक दिन में 40 हजार से अधिक कॉल प्राप्त हुए थे और इसका डेटा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इसे जिलेवार तैयार करने में समय लग रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कॉल सेंटर की नियमित समीक्षा की जाती है और तकनीकी समस्याओं को दूर करने के प्रयास किए जाते हैं।