Life Unlocked कार्यक्रम में अमोल वागले ने बताए सफल और संतुलित जीवन के सूत्र

जबलपुर। आर्ट ऑफ लिविंग ज्ञान क्षेत्र, जबलपुर में आयोजित ‘लाइफ अनलॉक्ड’ कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी, प्रेरणादायक वक्ता एवं लाइफ कोच अमोल वागले जी ने उपस्थित जनसमूह को जीवन को उसकी संपूर्णता में स्वीकार कर प्रसन्न, संतुलित एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी।

भय और असफलता भी विकास के साधन

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में अमोल जी ने कहा कि जीवन में भय और असफलता दोनों ही हमारे विकास के साधन हैं। यदि हम असफलता और अस्वीकृति को सहजता से स्वीकार करना सीख लें, तो जीवन की हर परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “सफल होने पर व्यक्ति दूसरों का आदर्श बनता है और असफल होने पर दूसरों का मार्गदर्शक।”

वास्तविक परिवर्तन स्वयं को समझने से आता है

उन्होंने बताया कि किसी भी संबंध की नींव प्रेम, सम्मान, विश्वास और सहजता पर टिकी होती है। जीवन, करियर या संबंधों में केवल परिस्थितियों को बदलने से नहीं, बल्कि स्वयं को समझने और अपने मन पर कार्य करने से वास्तविक परिवर्तन आता है। मन के शांत होने पर व्यक्ति हर चुनौती का सामना सहजता से कर सकता है।

खुशी बाहरी उपलब्धियों में नहीं, अपने अस्तित्व में है

अमोल जी ने कहा कि इच्छाएँ अनंत हैं। एक इच्छा पूरी होने पर अनेक नई इच्छाएँ जन्म लेती हैं, इसलिए प्रसन्नता को बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व में खोजना चाहिए। “खुश होना है क्योंकि हमारा होना ही खुशी है” का संदेश देते हुए उन्होंने सभी को वर्तमान में जीने और जीवन का उत्सव मनाने की प्रेरणा दी।

गुरु जीवन की दौड़ को अनुग्रह में बदल देते हैं

गुरु के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि गुरु केवल मार्ग नहीं दिखाते, बल्कि हमें हमारे गंतव्य तक पहुँचा देते हैं। गुरु के सान्निध्य में जीवन की दौड़ (Race) अनुग्रह (Grace) में परिवर्तित हो जाती है। उन्होंने गुरुदेव के प्रति समर्पण, साधना, सेवा और सत्संग को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।

चिंता छोड़ वर्तमान में जीने का संदेश

उन्होंने कहा कि चिंता सदैव अनिश्चित भविष्य से जुड़ी होती है, इसलिए हमें बार-बार अपने मूल स्वरूप में लौटना चाहिए, जो शाश्वत और निश्चित है। सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती तथा प्रत्येक अच्छा कार्य समय लेता है, लेकिन एक दिन अवश्य पूर्ण होता है।

जीवन को उत्सव की तरह जीने का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में अमोल वागले जी ने सभी को संदेश दिया कि जीवन को आनंद, तृप्ति और उत्सव के साथ जिएँ तथा ऐसा जीवन जिएँ कि लोग हमारे होने का उत्सव मनाएँ, हमारे जाने का नहीं।

बड़ी संख्या में साधकों ने की सहभागिता

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधकों एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और जीवन को नई दृष्टि से समझने का अवसर प्राप्त किया।

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