
अपराध रोकथाम से रेस्क्यू तक सक्रिय भूमिका
रंजना नागर ने वन एवं वन्यजीव अपराधों की रोकथाम, रात्रि एवं मानसून गश्त, वन्यजीव रेस्क्यू तथा ग्रामीण जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई है। भालू शिकार प्रकरण की जांच में सहयोग के साथ नीलगाय और जंगली सूअरों के रेस्क्यू तथा कुएं में गिरे तेंदुए और बछड़े को सुरक्षित निकालने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अतिक्रमण हटाने और अवैध कटाई पर रोक लगाने के अभियानों में भी उन्होंने भागीदारी की।
‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप’ में भी निभाई सक्रिय भूमिका
संवेदनशील वन क्षेत्रों में ‘ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप’ के तहत पैदल गश्त के अलावा पालतू बनाए गए तोतों और कछुओं को मुक्त कराने के लिए चलाए गए ‘फ्री मिट्ठू, फ्री किट्टू’ अभियान में भी रंजना नागर ने सक्रिय योगदान दिया। उन्होंने ग्राम वन समितियों, चरवाहा सम्मेलनों और ग्रामीण समुदायों के बीच जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया।
सर्पदंश से बचाव के लिए जागरूकता अभियान
सर्पदंश से बचाव के लिए मच्छरदानी, टॉर्च, विशेष स्नेक कार्ड और सांप-सीढ़ी आधारित जागरूकता सामग्री के वितरण में भी उनकी भूमिका रही है। इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व और सर्पदंश से बचाव को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सम्मान
समारोह में मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष रामनिवास रावत तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा ने रंजना नागर को पुरस्कार प्रदान किया।
इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक बीएस अन्निगेरी, मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव सुदीप सिंह, सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी सुहास कुमार एवं एचएस नेगी तथा WWF-India और प्रभा खेतान फाउंडेशन के प्रतिनिधियों सहित वन विभाग के अधिकारी एवं पुरस्कार विजेता मौजूद रहे।
दक्षिण पन्ना वनमंडल के लिए गौरव
रंजना नागर को मिला यह सम्मान वन्यजीव संरक्षण, अपराध नियंत्रण, रेस्क्यू और जनजागरूकता के क्षेत्र में किए गए कार्यों की पहचान के रूप में देखा जा रहा है। उनके सम्मान से दक्षिण पन्ना वनमंडल और पन्ना जिले के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को भी पहचान मिली है।