
जबलपुर। भगवान शिव का स्वरूप देखने में बड़ा ही प्रतीकात्मक और संदेशप्रद है। भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तापों का प्रतीक है। भगवान शिव के हाथों में केवल त्रिशूल ही नहीं है अपितु जो त्रिशूल है, उसमें भी डमरू बँधा हुआ है। त्रिशूल वेदना का तो डमरू आनंद का प्रतीक है। जीवन ऐसा ही है, यहाँ वेदना तो है ही मगर आनंद भी कम नहीं है।
आज आदमी अपनी वेदनाओं से ही इतना ग्रस्त रहता है, कि आनंद उसके लिए एक काल्पनिक वस्तु मात्र रह गई है। दु:खों से ग्रस्त होना यह अपने हाथों में नहीं मगर दुःखों से त्रस्त होना यह अवश्य अपने हाथों में है। भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल और उसके ऊपर लगा डमरू हमें इस बात का संदेश देते हैं कि भले ही त्रिशूल रूपी तीनों तापों से तुम ग्रस्त हों मगर डमरू रूपी आनंद भी साथ होगा तो फिर नीरस जीवन भी उमंग और उत्साह से भर जाएगा, उक्त उद्गार जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने नरसिंह मंदिर में श्रावण मास महोत्सव के द्वितीय श्रावण सोमवार को रूद्राभिषेक में कहे।
नरसिंह मंदिर में प्रतिदिन रुद्राभिषेक और महाआरती
श्रावण मास में नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में प्रतिदिन प्रातः काल 9 बजे से रूद्राभिषेक, महापूजन अभिषेक महाआरती महाराज जी के सानिध्य में आयोजित है।
महाभिषेक में श्रद्धालुओं की उपस्थिति
नर्मदेश्वर महादेव के महाभिषेक में अशोक मनोध्या, राजेंद्र इंदू प्यासी, लोकराम कोरी, प्रकाश मिश्रा, रेखा मिश्रा, उमेश तिवारी, एस. वी. मिश्रा, आचार्य रामफल शास्त्री, कामता शास्त्री, लालमन मिश्रा, हिमांशु, प्रियांशु सहित भक्तों की उपस्थित रही।