
जबलपुर। मध्यप्रदेश में पिछले एक सप्ताह से जारी तेज और लगातार बारिश ने हालात बेहद खराब कर दिए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में एक स्ट्रांग मानसूनी सिस्टम सक्रिय है, जिसके असर से पूर्वी हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी है और अगले कुछ दिन ऐसा ही मौसम बना रहेगा।रविवार को भी कई जिलों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहा। इसी बीच पिछले साल की अपेक्षा इस बार करीब 23 दिन पहले बरगी बांध के नौ गेट खोल दिए गए हैं।
रविवार सुबह से जबलपुर शहर में लगातार रिमझिम और मध्यम बारिश होती रही, जिससे शहर की गलियों और मुख्य सड़कों पर पानी भर गया। मौसम विभाग ने रविवार को 21 जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसमें जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा, नरसिंहपुर, शिवपुरी, श्योपुर, उमरिया, डिंडोरी और कटनी समेत कई जिले शामिल हैं।
कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात
शनिवार को शिवपुरी, शहडोल, नरसिंहपुर और श्योपुर जिलों के कई गांव और कस्बे जलमग्न हो गए। नरसिंहपुर जिले में तो पिछले दो दिनों से लगातार भारी बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। वहां गांवों और शहरों की गलियों में पानी भर गया है। सड़कें कीचड़ से लथपथ और कई जगहों पर कट गई हैं। पुल और पुलिया टूट गए हैं। नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लोग जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट गया है।
नदियां उफान पर, बांधों के गेट खोले गए
नर्मदा नदी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जबलपुर में नर्मदा पर बने बरगी बांध के 9 गेट रविवार को खोल दिए गए हैं ताकि जलस्तर नियंत्रित किया जा सके। इससे निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। शनिवार देर रात तक नर्मदा के घाट किनारे बसे इलाकों में पानी घुस गया, जिससे दुकानदारों और रहवासियों को सतर्क किया गया। उमरिया जिले के जौहिला डैम के गेट भी खोले गए हैं। अन्य छोटी नदियां और बरसाती नाले भी उफान पर हैं, जो निचले इलाकों में पानी भरने की बड़ी वजह बने हैं।

सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त, आवागमन बाधित
नरसिंहपुर जिले के स्टेट हाईवे 22 पर बंदेसुर और बटेसरा के बीच एक पुलिया धंसने से करेली-गाडरवारा मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। यह मार्ग जिले का मुख्य संपर्क मार्ग है, जिस पर रोज सैकड़ों वाहन चलते हैं। पुलिया धंसने के बाद दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्रियों को वापस लौटना पड़ा। प्रशासन ने मौके पर जेसीबी और पीडब्ल्यूडी की टीम भेजी है, लेकिन तेज बहाव के कारण मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका।

वहीं, नेशनल हाईवे-45 पर भरवारा के पास एक बड़ा पेड़ गिरने से हाईवे पूरी तरह जाम हो गया। वहां भी गाड़ियों की लंबी लाइनों के बीच कुछ वाहन वैकल्पिक रास्तों से निकले, लेकिन कीचड़ और संकरी सड़क के कारण दुर्घटना और फिसलने का खतरा बना रहा।
गोटेगांव में दो साल से पुल अधूरा पड़ा है, जिससे तेज बारिश में नदी में बहने का बड़ा खतरा बन गया है। जयथारी में तो लोग रस्सी के सहारे नदी पार कर रहे हैं क्योंकि वहां पुल 6 साल से अधूरा है। यह तस्वीर प्रदेश में अधूरी परियोजनाओं और कमजोर संरचनाओं की पोल भी खोल रही है।
भारी बारिश का अलर्ट जारी
रविवार को मौसम विभाग ने जबलपुर, नरसिंहपुर, सागर, शहडोल, रीवा, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, शिवपुरी, श्योपुर, अशोकनगर, सतना, पन्ना समेत 21 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अधिकारी और आपदा प्रबंधन दल सतर्क हैं, लेकिन लगातार बारिश और जलभराव के चलते राहत और बचाव कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
फिलहाल, मध्यप्रदेश में मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में भारी बारिश की स्थिति और गंभीर हो सकती है।