RDVV में परीक्षा के दौरान फिर बड़ी चूक, चतुर्थ सेमेस्टर की जगह बांट दिया तीसरे सेमेस्टर का पेपर

एमए अंग्रेजी के विद्यार्थियों को लगातार दूसरी परीक्षा में गलत प्रश्नपत्र मिलने से नाराजगी, विश्वविद्यालय को सौंपा आवेदन

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में परीक्षा संचालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एमए अंग्रेजी चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को लगातार दूसरी परीक्षा में गलत सेमेस्टर का प्रश्नपत्र वितरित किए जाने का मामला सामने आया है। 24 सितंबर की परीक्षा के बाद 26 सितंबर को आयोजित परीक्षा में भी इसी तरह की गलती दोहराए जाने से विद्यार्थियों में नाराजगी है।

पहली परीक्षा में भी बांटा गया था गलत प्रश्नपत्र

बताया गया कि एमए अंग्रेजी चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा में 24 सितंबर को क्रिटिकल थ्योरी विषय का पेपर था। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को जो प्रश्नपत्र दिया गया, वह चतुर्थ सेमेस्टर के बजाय तृतीय सेमेस्टर का था। विद्यार्थियों ने तत्काल इस पर आपत्ति जताई और विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मामले से अवगत कराया।

पहली घटना के बाद विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि परीक्षा विभाग आगामी पेपरों में प्रश्नपत्रों की सही तरीके से जांच करेगा। हालांकि, 26 सितंबर को इंग्लिश लैंग्वेज विषय की परीक्षा में भी चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को तृतीय सेमेस्टर का प्रश्नपत्र दिए जाने की बात सामने आई।

शिकायत के बावजूद दोहराई गई गलती

विद्यार्थियों का कहना है कि पहली परीक्षा में हुई त्रुटि की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले ही लिखित रूप में दी जा चुकी थी। इसके बावजूद अगले ही पेपर में उसी तरह की गलती सामने आना परीक्षा व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है।

लगातार दो परीक्षाओं में गलत सेमेस्टर का प्रश्नपत्र पहुंचने से विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ गई है। छात्रों ने 26 सितंबर को फिर विश्वविद्यालय प्रशासन को आवेदन सौंपकर मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।

विद्यार्थियों ने उठाए परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल

छात्रों के अनुसार परीक्षा कार्यक्रम में विषय और सेमेस्टर पहले से निर्धारित होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र वितरण से पहले इसकी जांच की जानी चाहिए। लगातार दो पेपर में एक जैसी गलती होने से विद्यार्थियों की तैयारी और परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होने की स्थिति बन रही है।

विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर गलती के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही प्रभावित विद्यार्थियों के हित में परीक्षा संबंधी उचित निर्णय लिया जाए, जिससे गलत प्रश्नपत्र के कारण उनके परिणाम पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।