पितृपक्ष देव आराधना और आत्म शुद्धि का दिव्य अनुष्ठान: स्वामी श्रीअशोकानंद जी महाराज

भक्ति धाम में पितृपक्ष के अवसर पर श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन

जबलपुर। पितरों को प्रसन्न करने के लिए बड़े बुजुर्गों की सेवा करना चाहिए। माता सीता ने दशरथ का तर्पण किया था। सत्कर्म करते हुए दैनिक दिनचर्या का पालन करना चाहिए। राम नाम सुखदाई है, कर्म की प्रधानता रखकर सबको आगे बढ़ना चाहिए। श्रीकृष्ण ने लीलाओं में सदैव धर्म का पालन किया है।

उक्त उद्गार भागवताचार्य स्वामी श्रीअशोकानंद जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के तृतीय दिवस व्यास पीठ से व्यक्त किए।

पितृपक्ष में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

भक्ति धाम गौरीघाट में पितृपक्ष के अवसर पर नर्मदा मैया के तट पर परम पूज्य भागवताचार्य स्वामी श्रीअशोकानंद जी महाराज के श्रीमुख से 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर 4 बजे से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का श्रवण कराया जा रहा है।

सेवा, सत्कर्म और धर्म पालन का संदेश

कथा के दौरान स्वामी श्रीअशोकानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को पितरों के प्रति श्रद्धा के साथ बड़े-बुजुर्गों की सेवा, सत्कर्म और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कर्म की प्रधानता रखते हुए अपने जीवन में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होने का आग्रह

भागवत सेवा समिति के गोपाल, पप्पू, विजय, उमेश पारवानी, वेदान्त शर्मा, करिश्मा शर्मा, जया लालवानी, हितिशा शर्मा, विनू माखीजा, ममता कुकरेजा, घनश्याम निरंकारी, दिलीप तलरेजा, नरेंद्र, पुष्पराज पंडित, लालू महाराज, अभिषेक और रामजी पुजारी ने श्रद्धालु भक्तों से कथा में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।

रिपोर्ट: विध्‍येश भापकर