
जबलपुर। हनुमान जी केवल बल के प्रतीक नहीं हैं, वे बुद्धि, विवेक, विनम्रता और सेवा के भी प्रतीक हैं। आज के जीवन में हम देखते हैं कि व्यक्ति के पास धन, पद और प्रतिष्ठा हो सकती है, लेकिन यदि सही समय पर सही निर्णय लेने की बुद्धि नहीं है, तो सारी योग्यताएं अधूरी रह जाती हैं। ये उद्गार कटंगा स्थित विन्ध्य भवन, जबलपुर में 21 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक आयोजित हनुमत चरित्र प्रवचन सत्र के पंचम दिन परमहंस स्वामी गिरीशानंद सरस्वती जी महाराज ने व्यक्त किए।
महाराज जी ने कहा कि हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि बलवान होना अच्छी बात है, लेकिन बल का उपयोग किसके लिए करना है, यह समझना उससे भी बड़ी बात है। अपनी शक्ति का उपयोग दूसरों को दबाने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों का सहारा बनने के लिए करना चाहिए।
अपनी योग्यता पर विश्वास रखना जरूरी
महाराज जी ने कहा कि कई बार हम असफल इसलिए नहीं होते कि हमारे पास योग्यता नहीं है, बल्कि इसलिए होते हैं कि हम अपनी योग्यता पर विश्वास करना छोड़ देते हैं। ऐसे समय में आवश्यकता होती है अपने भीतर के हनुमान को जगाने की। जब जीवन में कोई जिम्मेदारी स्वीकार कर लें, तो उसे ईमानदारी से पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।
शक्ति और बुद्धि का सही समय पर उपयोग ही वास्तविक समझदारी
महाराज जी ने बताया कि हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि हर परिस्थिति में एक ही तरीका काम नहीं करता। जहां शक्ति की आवश्यकता हो, वहां शक्ति का प्रयोग करें और जहां बुद्धि की आवश्यकता हो, वहां बुद्धि का। हनुमान जी बताते हैं कि पद बड़ा होने से कोई बड़ा नहीं बनता, बल्कि विचार बड़े होने से व्यक्ति बड़ा बनता है। अधिकार मिलने से कोई महान नहीं होता, उस अधिकार का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करने से महानता आती है।
श्रद्धालुओं ने किया प्रभु श्री रामभद्र सरकार एवं महाराज जी का पूजन
प्रभु श्री रामभद्र सरकार एवं महाराज जी का पूजन सर्वश्री रविनंदन सिंह जी, न्यायमूर्ति श्री विशाल मिश्रा, न्यायाधीश श्री द्वारकाधीश बंसल, न्यायमूर्ति श्री दीपक खोता, न्यायमूर्ति श्री आर.सी. बिसेन, न्यायमूर्ति श्री बी.पी. शर्मा, न्यायमूर्ति श्री अमित लाहोटी, न्यायमूर्ति श्री विजय शुक्ला, डॉ. कैलाश गुप्ता, प्रभात साहू, सोनू बचवानी, प्रदीप सिंह, डॉ. जितेंद्र जामदार, स्वाति गोडबोले, आर.आर. आहूजा, डॉ. सुनील मिश्रा, ठाकुर अभय सिंह, श्रीमती तनुश्री सिंह, बी.एस. परिहार, शरद अग्रवाल, कन्हैया जी भाईसाहब, राजवर्धन श्रीवास्तव, डॉ. मानसी, अशोक मिश्रा, अनिल शुक्ला, श्रीमती मीनू अग्रवाल, वंदना सिंह एवं किरण सिंह आदि ने किया।
श्री बी.एस. परिहार ने आभार व्यक्त किया। पूजन पंडित रोहित दुबे जी ने कराया तथा कार्यक्रम का संचालन पंडित सौरभ दुबे ने किया।