संकट कितना भी बड़ा हो, प्रभु अपने भक्त को विस्मृत नहीं करते : स्वामी गिरीशानंद सरस्वती

हनुमत चरित्र प्रवचन के चतुर्थ दिन हनुमान जी की भक्ति, जानकी माता की कृपा और प्रभु श्रीराम पर अटूट विश्वास का बताया महत्व

जबलपुर। हनुमान जी अशोक वाटिका में फल खाने आए थे। अशोक वाटिका ऐसी जगह थी, जहां दुष्ट प्रवृत्तियां भजन का फल प्राप्त करने में बाधा बनती हैं, लेकिन जानकी माता की कृपा हुई तो हनुमान जी ने फलाहार किया। यह प्रसंग जीवन के लिए एक सुंदर संकेत देता है।

कटंगा स्थित विंध्य भवन, जबलपुर में 21 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक आयोजित हनुमत चरित्र प्रवचन सत्र के चतुर्थ दिन परमहंस स्वामी गिरीशानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि जीवन में सत्संग और भक्ति की वाटिका में प्रवेश करने के बाद भी विकार साधना के फल को ग्रहण करने से रोक सकते हैं। ऐसे में जानकी जी की कृपा का अर्थ है कि भगवान की कृपा से ही मनुष्य सत्संग और भक्ति के वास्तविक फल को प्राप्त कर सकता है।

परमहंस स्वामी गिरीशानंद सरस्वती जी महाराज

 

हनुमान जी से जुड़कर विभीषण को मिली शरणागति

महाराज जी ने कहा कि जब तक विभीषण जी का जीवन रावण और कुंभकरण से जुड़ा हुआ था, तब तक उनका कल्याण नहीं हुआ। लेकिन जब वे हनुमान जी से जुड़े, तब उनके जीवन में यथार्थ शरणागति आई और वे प्रभु श्रीराम से मिलने की ओर उन्मुख हुए।

हनुमान जी केवल मुद्रिका नहीं, आशा और विश्वास लेकर आए

महाराज जी ने कहा कि हनुमान जी केवल एक मुद्रिका लेकर नहीं आए थे, वे आशा लेकर आए थे। वे विश्वास लेकर आए थे। वे यह संदेश लेकर आए थे कि संकट कितना भी बड़ा हो, प्रभु अपने भक्त को विस्मृत नहीं करते। इसीलिए हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। वे भक्त के जीवन में प्रभु के प्रति विश्वास का संचार करते हैं।

विश्वास ही जीवन को देता है नई दिशा

महाराज जी ने कहा कि जीवन में कई लोग आपको ठगेंगे, कई आपको निराश करेंगे और कई बार आप भी संपूर्ण परिस्थितियों पर संदेह करेंगे। लेकिन इस पूरे माहौल में जब आप रुककर पुनः किसी व्यक्ति, प्रकृति या स्वयं पर ‘विश्वास’ करेंगे, तो रामायण के पात्र बन जाएंगे।

श्रद्धालुओं ने किया पूजन

प्रभु श्री रामभद्र सरकार एवं महाराज जी का पूजन सर्वश्री रविनंदन सिंह, न्यायमूर्ति के.के. त्रिवेदी, न्यायाधीश एस.के. पालो, न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी, न्यायमूर्ति डी.के. पालीवाल, अश्विनी परांजपे, आत्मिका सिंह, अर्चना अग्रवाल, रेखा चुडासमा, डॉ. जितेंद्र जामदार, शशांक शेखर, आलोक मिश्रा, आलोक चंसोरिया, चिंटू चौकसे, संदीप जैन, प्रशांत केसरवानी, डी.पी. सिंह, के.पी. सिंह, मृगेंद्र सिंह, रूप नारायण गुप्ता, आर.बी. सिंह, संजय अग्रवाल, भगवान दास धीरावानी, श्रीमती तनुश्री सिंह, बी.एस. परिहार, प्रीति शुक्ल, रेखा सिंह, वंदना सिंह और किरण सिंह सहित अन्य श्रद्धालुओं ने किया।

पूजन पंडित रोहित दुबे ने संपन्न कराया तथा कार्यक्रम का संचालन पंडित सौरभ दुबे ने किया।