
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा व्रत का पालन किया जाता है। हिन्दू धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। इस दिन पूजा-पाठ, स्नान-दान और गुरु पूजन का विशेष महत्व होता है। यह पर्व गुरु की महिमा को समर्पित होता है, जिन्हें हमारे जीवन के मार्गदर्शक और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु का पूजन करने से ज्ञान, सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है। गुरु पूर्णिमा व्रत से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस अवसर पर शिष्य अपने गुरु के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
गुरु पूर्णिमा 2025: तिथि और मुहूर्त
ज्योतिष्याचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि 9 जुलाई 2025 को रात 12:49 बजे प्रारंभ होगी और 10 जुलाई 2025 को रात 1:31 बजे समाप्त होगी। चूंकि चंद्रमा की पूजा और गुरु पूजन पूर्णिमा तिथि पर ही किया जाता है, इसलिए इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई 2025 (गुरुवार) को मनाई जाएगी।
जो श्रद्धालु व्रत का पालन करते हैं, उनके लिए 10 जुलाई का दिन विशेष फलदायी रहेगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर पूजा करने, और फिर अपनी सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करने से पुण्य लाभ की प्राप्ति होती है। यदि इस दिन गंगा स्नान किया जाए तो जीवन में सुख-समृद्धि और दोषों की निवृत्ति होती है।
गुरु पूर्णिमा पर बन रहे हैं विशेष योग
इस बार गुरु पूर्णिमा पर अनेक शुभ योगों का संयोग बन रहा है। 10 जुलाई को गुरु योग, ऐन्द्र योग, अमृत योग तथा सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत मंगलकारी और शुभ माना गया है। पूजा-पाठ और दान के लिए यह विशेष अवसर बन रहा है।
10 जुलाई को पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 8:19 बजे से लेकर दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। इस अवधि में गुरु पूजन, चंद्र पूजन, कथा श्रवण और दान करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होगी। इस दिन विद्यार्थी, साधक, भक्त और शिष्य अपने-अपने गुरुजनों से आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन में प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हैं।