सावन 2025: तीन माह जल समाधि में रहते हैं महादेव, बढ़ता जा रहा शिवलिंग का आकार

दमोह-पन्ना मार्ग पर गैसाबाद के समीप व्यारमा नदी के बीचों-बीच विराजे जलखंडेश्वर महादेव

रवीन्‍द्र सुहाने

जबलपुर। दमोह जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर दमोह-पन्ना मार्ग पर गैसाबाद के समीप व्यारमा नदी के बीचों-बीच विराजे हैं भगवान जलखंडेश्वर महादेव। बारिश के दौरान यह शिवलिंग तीन माह तक जल समाधि में रहता है। स्थानीय श्रद्धालुओं और ग्रामीणों का मानना है कि शिवलिंग का आकार समय के साथ-साथ स्वतः बढ़ता जा रहा है, जो इसे और भी अद्भुत और आस्था का केंद्र बनाता है।

दो जिलों की आस्था का केंद्र

यह शिवलिंग दमोह और पन्ना जिले की सीमा पर स्थित है। दोनों जिलों के श्रद्धालु यहां पूजन अर्चन के लिए पहुंचते हैं। खास अवसरों पर यहां की भक्ति और उत्सव का माहौल और भी विशेष हो जाता है। व्‍यारमा नदी क दोनों ओर मेला का आयोजन भी होता है।

नदी में पानी बढ़ते ही तीन महीने के लिए पूरी तरह जलमग्‍न हो जाता है जलखंडेश्‍वर धाम।

1917 में हुआ था शिवलिंग का प्राकट्य

अदनवारा निवासी श्याम सुंदर पटेल (लंबरदार) के अनुसार वर्ष 1917 में मछुआरे जब व्यारमा नदी में मछली पकड़ रहे थे, तब बार-बार एक छोटा सा पत्थर उनके जाल में फंस रहा था। मछुआरे उस पत्थर को निकाल कर नदी में डाल देते, लेकिन वह फिर जाल में फंस जाता। बाद में उन्होंने उस पत्थर को नदी के टीले पर रख दिया। दूसरे दिन संंन्‍यासी मठ के साधु संत जब स्‍नान करने आए तो उनकी नजर उस पत्थर पर पड़ी, तो उन्होंने देखा कि उसका आकार शिवलिंग जैसा है। इसके बाद उन्‍होंने विधिवत पूजन शुरू किया और फिर समय के साथ श्रद्धालुओं ने वहां एक विशाल चबूतरे का निर्माण कराया।

आकार में लगातार हो रहा विस्तार

गैसाबाद के पंडित राममिलन तिवारी बताते हैं कि प्रारंभ में यह शिवलिंग आकार में छोटा था, लेकिन समय के साथ इसका आकार धीरे-धीरे बढ़ता गया। बारिश के दिनों में जब व्यारमा नदी में बाढ़ आती है, तब भी शिवलिंग यथावत स्थिति में बना रहता है। इस दौरान श्रद्धालु नदी किनारे घाटों से ही पूजा करते हैं। बाढ़ उतरने के बाद लोग पुनः चबूतरे तक पहुंचकर पूजन करते हैं। सावन में नदी किनारे से ही पूजन होता है।

मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि पर लगता है मेला

यहां हर वर्ष मकर संक्रांति पर दमोह जिले की ओर और होली के समय पन्ना जिले की ओर से मेला आयोजित होता है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु भगवान जलखंडेश्वर के दर्शन और पूजन के लिए यहां जुटते हैं। पर्व के दौरान धार्मिक आयोजन, भजन-कीर्तन और सामूहिक पूजा जैसे कार्यक्रम भी होते हैं। बैशाख के महीना में श्रद्धालु नित्‍य प्रति स्‍नान, दान और पूजन करने यहां आते हैं।

नदी के बीच से होती है यात्रा, नाव की होती है व्यवस्था

शिवलिंग नदी के बीच स्थित होने के कारण श्रद्धालुओं को जल मार्ग से पहुंचना पड़ता है। सामान्य दिनों में जलस्तर कम होता है, तो लोग पैदल भी पहुंचते हैं, लेकिन विशेष अवसरों या बाढ़ के समय नाव की व्यवस्था की जाती है। इससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित रूप से भगवान के समीप पहुंचने की सुविधा मिलती है।

कैसे पहुंचें

दमोह, हटा और पन्‍ना से बस द्वारा गैसाबाद तक पहुंचा जा सकता है। यहां से पैदल ही करीब दो किमी पैदल चलकर यहां पहुंचा जा सकता है। निजी वाहन से जाने पर नदी किनारे तक वाहन पहुंच जाता है। यह क्षेत्र पन्‍ना जिला मुख्‍यालय से करीब 75 किमी दूर हैं।

फोटो: जिमी नगरिया

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