
भोपाल। भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद को नया जीवन मिलता दिख रहा है। आयुष मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए देशभर के 355 आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों को मान्यता प्रदान की है। इसमें मध्यप्रदेश के 28 कॉलेज प्रमुख रूप से शामिल हैं, जिनमें 07 शासकीय और 21 निजी कॉलेज हैं। यह फैसला न केवल आयुर्वेद शिक्षा को मजबूती देगा, बल्कि युवाओं को रोजगार और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई दिशा भी प्रदान करेगा।
राज्यवार सूची: कहां-कहां के कॉलेजों को मिली मंजूरी
आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने बताया कि देश में कुल 598 आयुर्वेद कॉलेजों में से 355 को नई मान्यता प्राप्त हुई है। इन कॉलेजों का राज्यवार आंकड़ा इस प्रकार है: मध्यप्रदेश के 28, आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम के 1-1 कॉलेज, बिहार के 2, हरियाणा का 1, छत्तीसगढ़ के 6, गोवा का 1, गुजरात के 32, हिमाचल प्रदेश के 3, कर्नाटक के 50, केरल के 10, महाराष्ट्र के 100, दिल्ली के 2, मेघालय के 2, ओडिशा के 5, पंजाब के 9, पांडिचेरी के 1, राजस्थान के 6, तमिलनाडु के 4, तेलंगाना का 1, उत्तरप्रदेश के 60, उत्तराखण्ड के 14 और पश्चिम बंगाल के 4 कॉलेजों को मान्यता प्रदान की गई है।
नीट काउंसलिंग से होंगे आयुर्वेद कॉलेजों में दाखिले
डॉ. पाण्डेय ने जानकारी दी कि इन कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया NEET काउंसलिंग के माध्यम से ही पूरी होगी। यह प्रक्रिया पारदर्शिता को बढ़ावा देती है और योग्य छात्रों को सही संस्थानों में प्रवेश का अवसर देती है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर के शेष आयुर्वेद कॉलेजों की मान्यता पर भी जल्द निर्णय आने की संभावना है।
आयुर्वेद की विशेषताएं: चिकित्सा से अधिक एक जीवनशैली
आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवनशैली है। यह शारीरिक, मानसिक और आत्मिक संतुलन पर आधारित है। आयुर्वेद में इलाज केवल बीमारी को दूर करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को पूर्ण रूप से स्वस्थ और संतुलित बनाना है। इसमें पंचमहाभूत सिद्धांत, त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) की अवधारणा और दैनिकचर्या जैसे महत्वपूर्ण आयाम शामिल हैं। इसके माध्यम से न केवल रोगों का उपचार किया जाता है, बल्कि रोगों की रोकथाम पर भी विशेष बल दिया जाता है।
स्वदेशी चिकित्सा प्रणाली को मिल रही मजबूती
सरकार द्वारा आयुर्वेद कॉलेजों की मान्यता बढ़ाया जाना देश की स्वदेशी चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह कदम न केवल भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाएगा, बल्कि आयुर्वेदिक दवाओं और उपचार पद्धतियों को भी नवाचार और रिसर्च के साथ जोड़ने का अवसर देगा।
आयुर्वेद का भविष्य उज्ज्वल
भारत में आयुर्वेदिक शिक्षा और चिकित्सा का भविष्य उज्ज्वल है। 355 कॉलेजों को मान्यता मिलने के बाद इस क्षेत्र में न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आयुर्वेद के वैज्ञानिक और व्यावसायिक विकास को भी बल मिलेगा। सरकार का यह निर्णय भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।