नागपंचमी 2025: मूर्ति जो करती है मंत्रमुग्ध: रहली में पूजी जाती है 10वीं सदी की नागयुग्म प्रतिमा

नागपंचमी पर विशेष पूजन का केंद्र बनती है नागयुग्म प्रतिमा

रहली/सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले के रहली में स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर के पीछे की दीवार पर दसवीं सदी की दुर्लभ नागयुग्म प्रतिमा जड़ी हुई है। नागपंचमी जैसे पर्वों पर यहां विशेष पूजन होता है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन के लिए आते हैं।

मानवमुखी नाग-नागिन की अद्वितीय मूर्तिकला

इस प्रतिमा में नाग और नागिन का ऊपरी भाग मानव रूप में है, जो अंजलि मुद्रा में हैं, जबकि नीचे का भाग सर्पाकार है। यह दुर्लभ मूर्ति न सिर्फ धार्मिक, बल्कि शिल्पकला की दृष्टि से भी अत्यंत मूल्यवान मानी जाती है।

सर्प मुकुट, अलंकारों से सजी दिव्य छवि

नाग-नागिन के सिर पर तीन-तीन फनों का मुकुट या छत्र बना हुआ है। प्रतिमा में दोनों नाग युगल के शरीर पर कुंडल, केयूर, कंकण तथा कटि सूत्र जैसे आभूषणों का बारीक अंकन किया गया है, जो उस काल की उत्कृष्ट कारीगरी को दर्शाता है।

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प्रतिमा की कमर में सर्पाकार कुंडली, नीचे वृश्चिक आकृति

इस प्रतिमा में दोनों के कटि प्रदेश परस्पर कुंडली के रूप में गुथे हुए हैं, और नीचे के हिस्से में अनुचर वृश्चिक की आकृति भी अंकित है। यह संपूर्ण संयोजन नाग तत्त्व की शक्ति और सौम्यता दोनों का प्रतीक माना जाता है।

सूर्य मंदिर और परिसर में विराजमान अन्य प्रतिमाएं

सुनार नदी के तट पर स्थित यह सूर्य मंदिर स्वयं में ऐतिहासिक धरोहर है। मंदिर की बाहरी दीवारों और परिसर में नौंवी-दसवीं सदी की अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण हैं। यह सूर्य मंदिर सुनार और देहार दो नदियों के संगम पर स्थित है।

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इतिहासकारों की राय में नौंवी सदी की मूर्ति

इतिहासकारों के अनुसार सूर्य मंदिर और इसकी सभी प्रतिमाएं नौंवी सदी की हैं। इन प्रतिमाओं की शैली, अलंकरण और भाव-भंगिमा तत्कालीन मूर्तिकला का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

सूर्य मंदिर: कर्क रेखा पर स्थित एक अद्वितीय धरोहर

रहली में स्थित सूर्य मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह भौगोलिक दृष्टि से भी विशिष्ट स्थान रखता है। यह देश का ऐसा इकलौता सूर्य मंदिर माना जाता है जो कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर स्थित है। यही कारण है कि यहां सूर्यपूजन और ज्योतिषीय महत्व की गतिविधियां विशेष रूप से देखी जाती हैं।

क्या है कर्क रेखा?

कर्क रेखा पृथ्वी की वह रेखा है, जो भूमध्य रेखा से लगभग 23.5° उत्तर में स्थित है। हर साल 21 जून को सूर्य ठीक इसी रेखा के ऊपर होता है, जिसे ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) कहा जाता है। भारत में यह रेखा मध्यप्रदेश सहित 8 राज्यों से होकर गुजरती है और रहली इसी अक्षांशीय क्षेत्र में आता है।

सूर्य मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

यह सूर्य मंदिर नौवीं से दसवीं सदी के बीच चंदेल वंश के शासनकाल में निर्मित माना जाता है। मंदिर की बनावट और मूर्तियों की शैली इस बात का संकेत देती हैं कि यह मंदिर समकालीन चंदेल स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण है। यहां की प्रमुख सूर्य प्रतिमा एक ही पत्थर से तराशी गई है, जिसमें भगवान सूर्य रथ सहित सात घोड़ों पर आरूढ़ दिखाई देते हैं।

ज्योतिष और भूगोल का अनोखा संगम

यह मंदिर न केवल एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारत की भौगोलिक संरचना और खगोलीय घटनाओं का भी जीवंत उदाहरण है। कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण यहां सूर्य की चाल और स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया जा सकता है, जो ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन के लिए एक उत्कृष्ट स्थान बनाता है।

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