
जबलपुर। श्रीकृष्ण के सभी बाल सखाओं में सुदामदेव सबसे योग्य थे। उन्होंने भगवान के प्रारब्ध कर्म को स्वयं लिया और जीवन में कष्ट सहन किए, लेकिन हरिनाम स्मरण कभी नहीं छोड़ा। विपरीत या सुखद समय में भी हरिनाम स्मरण और मित्रता बनाए रखना आवश्यक है।
ईश्वर की परीक्षा और मनुष्य का धैर्य
ईश्वर केवल उसी की परीक्षा लेता है, जो परीक्षा देने के योग्य होता है। ऐसे में हमें विचलित नहीं होना चाहिए। वास्तव में, विचलित होने पर ही हम ईश्वर के सबसे अधिक निकट होते हैं। शाखाओं पर कोपलें भी पतझड़ के बाद ही आती हैं। बिना संघर्ष के जीवन का कोई अर्थ नहीं है, और जो इन संघर्षों के बीच भी चेहरे पर मुस्कान रखता है, वही वास्तव में पूर्ण मनुष्य है।
मानव-जीवन का महत्व
धन, संपत्ति, मित्र, स्त्री बार-बार मिल सकते हैं, लेकिन मनुष्य-शरीर केवल एक बार प्राप्त होता है। एक बार नष्ट हो जाने के बाद इसे पुनः पाना असंभव है। इसीलिए इस मानव-देह को राष्ट्र और मानव कल्याण में लगाना ही इसकी सार्थकता है।
कथा के सप्तम दिवस के विचार
श्रावण मास के पावन अवसर पर सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस, श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष के प्रसंग पर व्यास पीठ से श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर पूज्य डॉक्टर नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने यह उद्गार व्यक्त किए।
पूजन और समिति की भूमिका
श्रीराम मंदिर महिला समिति की गीता पांडेय, सुनीता अरोड़ा, सुदेश खुराना, संगीता शर्मा, रुक्मणि अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, अनीता अग्रवाल, संगीता सेठ, बीना मल्होत्रा, भावना मल्होत्रा, सविता भाटिया और अन्य सदस्यों ने श्रीमद् भागवत महापुराण एवं महाराज श्री का पूजन-अर्चन और आरती की।
पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण
श्रीराम मंदिर मदन महल में 7 अगस्त को सुबह 11 बजे से पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा।
नरसिंह मंदिर में होगी श्री सनातन धर्म महासभा मातृशक्ति बैठक
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शोभायात्रा की तैयारियों को लेकर 7 अगस्त गुरुवार को सायं 4.30 बजे श्री नृसिंह मंदिर मे श्री सनातन धर्म महासभा महिला समिति की बैठक श्री नृसिंह पीठाधीश्वर पूज्य जगद्गुरु डॉ स्वामी नरसिंगदेवाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य संरक्षण में आहूत की गई है।
सभी मातृशक्ति ( महिला मंडल) से 7अगस्त गुरुवार को सायं 4.30 बजे नृसिंह मंदिर में आवश्यक रूप से बैठक में उपस्थिति हेतु आग्रह किया है।