
पंचांग के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। हस्त नक्षत्र, कन्या राशि और राज योग, साध्य, शुभ एवं सौम्य योग में यह महाव्रत 26 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से दुर्लभ संयोग
ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार इस बार का संयोग अत्यंत दुर्लभ है। हस्त नक्षत्र, कन्या राशि और राज योग, साध्य, शुभ एवं सौम्य योग के कारण शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व होगा। पूजा का शुभ समय शाम 4 बजकर 38 मिनट से रात 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इसी समय शुभ योगों की युति के साथ महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी और माता पार्वती का पूजन कर पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करेंगी।
शुभ योग का महत्व
जैसा योग का नाम है, उसी प्रकार यह योग शुभ होता है। इस योग में जन्म लेने वाले या किए गए कार्य सफल एवं सुंदर होते हैं। ये व्यक्ति बुद्धिमान, ज्ञानी और धनवान होते हैं तथा इनके जीवन में धन की कमी नहीं रहती।
हरतालिका का अर्थ
‘हरतालिका’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। पहला है ‘हरि’, जिसका अर्थ है हरना या हरण करना। दूसरा है ‘तालिका’, जिसका अर्थ है सखी। एक पौराणिक कथा के अनुसार, इस तिथि पर माता पार्वती की सखी ने उन्हें पिता हिमालय के घर से हरण कर जंगल में ले जाकर तपस्या करने की प्रेरणा दी थी। वहीं माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान भोलेनाथ को पति रूप में प्राप्त किया।
हरतालिका व्रत विधि
इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की पूजा करती हैं। परंपरा अनुसार मिट्टी से देवी-देवताओं की मूर्ति बनाकर पूजन किया जाता है।
हरतालिका तीज का व्रत निर्जला होता है, जिसमें न अन्न ग्रहण किया जाता है और न जल। अगले दिन जल पीकर पारण किया जाता है।
इस व्रत में आठों पहर पूजन का विधान है। रातभर जागरण करते हुए शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप या भजन करना चाहिए। पूजन के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा का श्रवण विशेष फलदायी माना जाता है।