
भोपाल। आयुर्वेद, सिद्धा, यूनानी, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथिक आयुष डॉक्टर बनने के लिए छात्रों को अब नेशनल एग्जिट टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा। साढ़े पांच वर्षीय डिग्री पूर्ण करने के बाद भी यदि छात्र यह परीक्षा पास नहीं करते हैं, तो उन्हें संबंधित बोर्ड में डॉक्टरी रजिस्ट्रेशन नहीं मिलेगा। रजिस्ट्रेशन नंबर के अभाव में वे आधिकारिक रूप से प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।
यह राष्ट्रीय परीक्षा वर्ष 2027 में पहली बार आयोजित होने की संभावना है। 2021-22 बैच के छात्र अपनी इंटर्नशिप अक्टूबर 2027 में पूर्ण करेंगे और तभी वे इस परीक्षा के लिए पात्र होंगे। भारत सरकार ने इस विषय में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
अच्छी कोशिश
आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने बताया कि भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) और राष्ट्रीय होम्योपैथिक आयोग (एनसीएच) की यह कोशिश है कि केवल योग्य छात्र ही आयुष मेडिकल प्रैक्टिस में आएं। वर्तमान में देशभर में 900 से अधिक आयुर्वेद, होम्योपैथिक, यूनानी, सिद्धा और सोवा-रिग्पा के मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जिनमें दो लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां नेशनल एग्जिट टेस्ट की अनिवार्यता नहीं होगी, वहां यह नियम लागू नहीं किया जाएगा।
निर्णय का स्वागत
जनमानस की सेवा केवल योग्य डॉक्टर ही कर सकें, इस उद्देश्य से एनसीआईएसएम, एनसीएच और भारत सरकार द्वारा नेशनल एग्जिट टेस्ट का निर्णय स्वागत योग्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परीक्षाएं मेडिकल, डेंटल और वेटरनरी जैसी विधाओं में भी लागू की जानी चाहिए।
डॉ. पाण्डेय ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को इस परीक्षा में पासिंग मार्क्स 50 प्रतिशत के बजाय नीट की तरह 50 पर्सेंटाइल रखना चाहिए, जिससे छात्रों के हित सुरक्षित रहें। ज्ञात रहे कि 2021-22 सत्र में प्रवेशित छात्रों की अंतिम परीक्षा जुलाई 2026 में होगी और उनकी एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप अक्टूबर 2026 से प्रारंभ होगी। इस प्रकार 2027 में पहला नेशनल एग्जिट टेस्ट आयोजित किया जाएगा।