
रवीन्द्र सुहाने
जबलपुर। जबलपुर-नागपुर मार्ग (एनएच-7) पर स्थित तिलवारा पुल पवित्र नर्मदा नदी पर बना एक अनोखा इंजीनियरिंग मॉडल है। जिसमें बरगी बांध की नहर भी बहती हैै। अब मेंटेनेंस की मांग कर रहा है। यह एक्वाडक्ट 1995-96 में बनाया गया था और करीब 30 साल के उपयोग के बाद यहां नहर के कई पिलरों में सीपेज और पुल की सतह में जर्जरता सामने आ रही है। एक पिलर में झरने की तरह पानी का लीकेज हो रहा है।
भारी वाहनों से बढ़ा दबाव
तिलवारा पुल पर हर घंटे 100 से अधिक भारी वाहन (बस-ट्रक, डंपर-हाइवा, ट्राला) गुजरते हैं। भारी मालवाहक गाड़ियों की निरंतर आवाजाही और पानी की सीपेज दोनों मिलकर इस अवसंरचना पर लंबे समय से दबाव डाल रहे हैं। एनएचएआई ने पूर्व में सड़क की जर्जर अवस्था पर कई बार मरम्मत कराई है। पिछले दिनों सड़क मार्ग और नहर को बंद कर भी मरम्मत कराई गई थी, लेकिन अब फिर समस्या बढ़ गई है।
नहर और हाईवे का अनोखा संगम
यहां की अनोखी बनावट कुछ यूं है कि नर्मदा नदी के ऊपर से ही बरगी बांध की एक नहर निकाली गयी है और उसी नहर के ऊपर से हाईवे भी गुजरता है। नहर नदी के तल से लगभग 100 फीट ऊपर बहती है और नदी के ऊपर इसकी लंबाई करीब 300 मीटर है। इस संरचना के नीचे छोटे-बड़े लगभग 21 पिलर हैं, जो नहर का भार सहन कराती हैं। बरगी बांध से निकली यह नहर जबलपुर, नरसिंहपुर और कटनी जिलों के लिए पानी पहुंचाती है और एक शाखा करीब 25 किलोमीटर आगे जाकर नर्मदा को क्रॉस करती है।
शनिधाम के पास पिलर से झरने जैसा बहाव
हाल ही में तिलवारा के शनिधाम के सामने वाले एक पिलर में सीपेज अत्यधिक होने के कारण पानी झरने की तरह तेज़ी से गिरता देखा गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि उस पिलर से रिसता पानी तेजी से नीचे गिर रहा है। ऐसा दृश्य देखकर लोग इंजीनियरिंग की इस जटिल रचना के प्रति हैरान भी हैं और चिन्तित भी। पानी के इस तरह झरने जैसा गिरना संकेत देता है कि पिलर के ठीक नीचे लगातार रिसाव हो रहा है और यदि समय रहते सुधार कार्य न हुए तो समस्या और बढ़ सकती है।
मेंटेनेंस की सख्त जरूरत
पिछले तीन दशकों में इस पुल और नहर से करोड़ों वाहन और करोड़ों गैलन पानी गुजर चुके हैं। जिसका असर संरचना पर साफ दिखता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी जगहों पर नियमित निगरानी, सीवेज व सीपेज का त्वरित निवारण और भारी वाहनों के भार प्रबंधन जैसी व्यवस्था आवश्यक होती है, नहीं तो छोटे मरम्मत कार्य अस्थायी ही सिद्ध होते हैं।
इंजीनियरिंग का आश्चर्य और चिंता
एनएच-7 के तिलवारा अडाॅक्ट पर केवल सड़क ही नहीं बल्कि नहर दोनों के साथ एक-दूसरे के ऊपर बहते दिखते हैं। यह दृश्य किसी के लिए इंजीनियरिंग का आश्चर्य का विषय है। उल्लेखनीय है कि इस एक्वाडक्ट का निर्माण जल संसाधन विभाग द्वारा कराया गया था। नेशनल हाईवे के नीचे से गुजरती यह नहर कई स्थानों पर अनूठी मानी जाती है।
स्थायी समाधान की दरकार
स्थानीय प्रशासन, जल संसाधन विभाग और एनएचएआई को मिलकर तात्कालिक रूप से स्थल का निरीक्षण कर पिलर-आधारित सीपेज का कारण पहचानना और स्थायी मरम्मत योजना लागू करना चाहिए। नदी के ऊपर से गुजरती नहर व उसी के ऊपर से लगे हाईवे की यही जटिल संरचना समय पर ठीक न होने पर दोनों जल आपूर्ति और सड़क संपर्क पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
वीडियो में कैद स्थिति
नज़दीकी दृश्य और पिलर से झरने जैसा गिरता पानी वीडियो में दर्ज किया गया है। वीडियो देखें और स्थिति की भयावहता खुद जांचें।
जल्द ही सुधार कराएंगे
जल संसाधन विभाग की कार्यपालन यंत्री संगीता दिवाकर ने बताया कि जानकारी लगते ही टीम ने मौके निरीक्षण किया था। इस समय पाटन क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की मांग है। पूर्ति होते ही नहर को खाली कराकर अंदर से चेक करेंगे और जल्द सुधार कराएंगे। इससे कोई खतरा नहीं है।