
जबलपुर। आर्ट ऑफ लिविंग का तीन दिवसीय हैप्पीनेस प्रोग्राम मदन महल स्थित एलआईसी के समीप आर्ट ऑफ लिविंग के इवेंट ऑफिस में आयोजित किया गया। इस विशेष आयोजन का नेतृत्व आर्ट ऑफ लिविंग की शिक्षिकाएं नीलम शर्मा, रश्मि बरसैयां और श्रेया बरसैयां ने किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को प्राणायाम, सुदर्शन क्रिया, ध्यान और जीवन जीने की कला सिखाई गई। रविवार को इसका समापन हुआ।
सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति
समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के बाद वे पहले से अधिक शांत, हल्का और ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं। प्रतिभागियों का मानना था कि यह अभ्यास न केवल दैनिक जीवन में तनाव से राहत देता है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आयोजन उनकी जीवनशैली में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आया है।
ज्ञान और प्रज्ञा फैलाने साधन बनने का अवसर
शिक्षिका नीलम शर्मा ने कहा कि गुरुदेव हमें शांति, स्वास्थ्य और कल्याण के मार्ग पर मार्गदर्शन दे रहे हैं। हमें इस ज्ञान और प्रज्ञा को फैलाने के लिए साधन बनने का अवसर मिल रहा है। प्रसन्न चेहरों और गहरे विश्राम की अवस्था से प्रतिभागियों में बदलाव स्पष्ट दिखाई दिया।
शिक्षिका रश्मि बरसैयां ने कहा कि प्रतिभागियों ने इस प्रोग्राम से जो भी सीखा है, उसे जीवन में उतारना बेहद जरूरी है। सुदर्शन क्रिया, प्राणायाम, योग और ध्यान में हमें अपना शत-प्रतिशत देना चाहिए। इससे मिलने वाला सुखद अनुभव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और समाज को भी लाभान्वित करता है।
शिक्षिका श्रेया बरसैयां ने कहा कि हमारे गुरुदेव ने सुदर्शन क्रिया के रूप में हमें एक अनमोल वरदान दिया है। हम इससे जुड़कर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं और उन्हीं की कृपा से यह संभव हुआ कि आप सब भी इस प्रोग्राम से जुड़ सके।
प्रतिभागियों की सहभागिता
इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। देनानाथ अरोड़ा, सुभाषिनी अरोड़ा, रवीन्द्र सुहाने, बीरेन्द्र गुप्ता, साधना सुहाने, खुशबू खन्ना, मुस्कान खन्ना, आशीष श्रीवास्तव, सिद्धार्थ गुप्ता, आनंद सिंह, दिवांश सुहाने और नीतू जैन सहित कई प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने साझा किया कि इस तीन दिवसीय साधना से उन्हें जीवन में नए दृष्टिकोण और सकारात्मक ऊर्जा मिली।
समापन का उत्साह
समापन समारोह में चारों ओर उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण रहा। प्रतिभागियों ने नियमित रूप से सुदर्शन क्रिया और ध्यान की साधना करने का संकल्प लिया। शिक्षकों ने भी सभी को साधना जारी रखने और आत्मविकास की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।