
जबलपुर। भानतलैया स्थित मां बड़ी खेरमाई मंदिर में नवरात्रि पर्व पर सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। माना जाता है कि मां भगवती का यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में प्रमुख गुप्त शक्तिपीठ है, जिसका इतिहास कल्चुरी काल से जुड़ा हुआ है और लगभग 800 वर्ष पुराना है। यहां तांत्रिकों और ऋषि-मुनियों ने अनादिकाल से शिला रूपी मातारानी की आराधना की है।
मंदिर का इतिहास
प्राचीन समय में मंदिर में केवल शिला रूपी प्रतिमा थी जो आज भी वर्तमान प्रतिमा के नीचे स्थापित है। इतिहास के अनुसार गोंड राजा मदनशाह जब मुगल सेना से पराजित होकर यहां पहुंचे, तब मां खेरमाई की पूजा करने के बाद उनमें नई ऊर्जा का संचार हुआ और उन्होंने मुगलों को परास्त कर विजय प्राप्त की। लगभग 500 वर्ष पूर्व गोंड राजा संग्रामशाह ने यहां मढ़िया का निर्माण कराया था।
पहले इस क्षेत्र में ग्रामीण बोली बोली जाती थी और गांव-खेड़े का रूप था, जिससे इसका नाम खेरमाई पड़ा। भले ही शहर अब महानगर बन गया है, लेकिन आज भी मां बड़ी खेरमाई को ग्राम देवी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर के ट्रस्टियों के अनुसार वर्तमान मंदिर का स्वरूप उन शिल्पियों के कौशल का परिचायक है जिन्होंने प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का भी निर्माण किया था।

1652 से जवारा विसर्जन परंपरा
मंदिर में जवारा विसर्जन की परंपरा 1652 की चैत्र नवरात्र से शुरू हुई थी। इस वर्ष यह परंपरा 373वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। सुरक्षा के लिहाज से मंदिर में आधुनिक तकनीक अपनाई गई है और 27 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है। मंदिर में वैदिक विधि से पूजा की जाती है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी को रात में मां की भव्य महाआरती होती है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज से भक्त पहुंचते हैं।
नवरात्र पर श्रृंगार और विशेष पूजन
नवरात्रि के 9 दिनों तक भक्त मां के चरणों में निरंतर सेवा करते हैं। विशेष रूप से सप्तमी, अष्टमी और नवमी की महाआरती का महत्व बहुत अधिक है। इन दिनों माता के श्रृंगार का आनंद लेने के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में रात के समय मंदिर पहुंचते हैं।
भक्तों के अनुभव
“नवरात्रि के दौरान मां बड़ी खेरमाई के चरणों में सेवा करने से अद्भुत ऊर्जा मिलती है।” – रमाकांत शास्त्री, पुजारी
“मैं हर नवरात्रि को परिवार सहित यहां आती हूं। मां की कृपा से परिवार में हर संकट दूर हो जाता है। मंदिर परिसर में श्रृंगार सामग्री और बच्चों के मनोरंजन की भी अच्छी व्यवस्था रहती है।” – बीरेंद्र गुप्ता, भक्त