श्रीकृष्ण की लीलाएं देती हैं प्रकृति संरक्षण का संदेश- जगतगुरु नरसिंह देवाचार्य जी महाराज

नरसिंह मंदिर गीता धाम में अन्नकूट महोत्सव संपन्न, 56 भोग अर्पित

जबलपुर। नरसिंह मंदिर गीता धाम में आयोजित श्रीगोवर्धन महाराज पूजन और अन्नकूट महोत्सव में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि “श्रीकृष्ण की लीलाएं केवल मनोरंजन या कथा नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, संवर्धन और संस्कारों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देती हैं।”

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र के अभिमान को तोड़ा और यह संदेश दिया कि प्रकृति हमारी रक्षक है, उसका पूजन और संरक्षण करना ही सच्ची भक्ति है। परमात्मा सृष्टि के पालनकर्ता हैं और वे भाव के भूखे हैं। जब भक्त सच्चे मन से सेवा करता है, तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं। इस लीलाओं से हमें यह सीख मिलती है कि अहंकार का स्थान जीवन में नहीं होना चाहिए और विनम्रता ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग है।

अन्नकूट में 56 भोग का अर्पण और भक्तों की सहभागिता

अन्नकूट महोत्सव के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजन (छप्पन भोग) अर्पित किए गए। मंदिर प्रांगण में भजन, कीर्तन और दीपमालाओं से वातावरण भक्तिमय बन गया। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक गोवर्धन पूजा में भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोवर्धन पर्वत के प्रतीक स्वरूप का पूजन किया।

पूजन-अर्चन का विधिवत आयोजन आचार्य लालमणि मिश्रा, रामजी पुजारी, आचार्य प्रियांशु और प्रवीण चतुर्वेदी सहित आचार्य गणों ने कराया। भगवान नरसिंह योगेश्वर श्रीकृष्ण की आरती में ब्रह्मचारी हिमांशु जी, शरद काबरा, राजेन्द्र प्यासी, संदीप जैन गुड्डा, प्रवेश खेड़ा, के.के. बस्सी, अंबर पुंज, आशीष शुक्ला, लोकराम कोरी, विध्येश भापकर, भोलाराम खत्री, राजेन्द्र यादव, डॉ. संदीप मिश्रा, हरीश मनोधया, जीवन कपिल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

भक्ति, सेवा और प्रकृति के प्रति आभार का उत्सव

कार्यक्रम के अंत में महाराज श्री ने कहा कि अन्नकूट महोत्सव केवल भोग का नहीं, बल्कि आभार का पर्व है — यह हमें सिखाता है कि अन्न, जल, पर्वत और वृक्ष सब भगवान के स्वरूप हैं। जब हम प्रकृति का सम्मान करते हैं, तब ईश्वर स्वयं हमारे जीवन में समृद्धि और शांति प्रदान करते हैं। उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि सभी अपने जीवन में पर्यावरण की रक्षा, गौ-सेवा और सादगीपूर्ण जीवन शैली अपनाएं — यही सच्चा गोवर्धन पूजा का संदेश है।

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