
राजीव उपाध्याय
जबलपुर। बिहार चुनाव में आधी आबादी यानि महिला वोटर्स के हाथ में सत्ता की चाबी है। वे गेम चेंजर बन सकती हैं। इसलिए एनडीए और महागठबंधन ने महिलाओं के लिए विभिन्न स्कीम के सौगातों की बौझार कर दी है। पिछले चुनाव का आकलन किया जाए तो उसमें भी यह देखा गया है कि पुरूषों की तुलना में महिला वोटर्स का स्ट्राइक रेट अधिक रहा है। इसलिए बिहार चुनाव में एनडीए और महागठबंधन की कोशिश है कि अधिकतम महिला वोटर्स को अपनी स्कीम बता सकें।
महिला वोटर्स पर नजर क्यों
बिहार में कुल मतदाता – 7.42 करोड़
महिला मतदाता – 3.49 करोड़
पिछले चुनावों का आकलन
चुनावी वर्ष – पुरूष – महिला वोटिंग प्रतिशत
2010 51.12% 54.49%
2015 53.32% 60.48%
2020 54.45% 59.69%
पिछले चुनावों का आकलन करने से साफ जाहिर होता है कि पुरूषों की तुलना में महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत अधिक रहा। यह आंकड़ा दिखाता है कि चुनाव में महिला वोटर्स के हाथ में ही सत्ता की चाबी है और वे ही चुनाव में गेम चेंजर बन सकती हैं। इसलिए एनडीए ने जैसे ही महिलाओं के लिए योजना लांच की वहीं महागठबंधन ने भी आनन फानन में महिलाओं के लिए विभिन्न् योजनाएं लांच कर दी। बिहार चुनाव में पार्टियों की महिलाओें को दी जाने वाली सौगातें पिलर की तरह खड़ी हो गई हैं जिनके सहारे नेता अपनी कुर्सी जमाने की कोशिश कर रहे हैं।
सीएम फेस पर निशाना
एनडीए में नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जा रहा है लेकिन उनको सीएम फेस घोषित नहीं किया है। जबकि महागठबंधन में तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित कर दिया है। इसलिए महागठबंधन एनडीए पर निशाना लगा रहा है। नीतीश कुमार के नाम पर महिला वोट जदयू को अच्छे मिल जाते हैं। महागठबंधन एक तीर से दो निशाना लगाकर महिला वोटर्स को यह बताने की कोशिश कर रहा है कि अभी वहां स्थिति क्लीयर नहीं है। वहीं एनडीए भी आरजेडी के पिछले शासन काल की याद दिला रहा है। बिहार चुनाव में दोनों गठबंधन चुनावी वैतरणी को पार करने के लिए महिला वोटर्स पर निर्भर हैं। वहीं तीसरी पार्टी जन सुराज अपनी योजनाओं को सामने रखकर चुनाव लड़ रही है। वह समग्र को लेकर चल रही है।
यूथ पर भी नजर
बिहार में एसआइआर के बाद पहली बार वोट करने वाले यूथ की संख्या 16 लाख है। पार्टियां इन वोटर्स को भी रिझाने की कोशिश कर रहा है। इनके रोजगार के लिए स्कीम की घोषणाएं की हैं।
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