प्रभु कृपा और सत्संग से मिलता है बुध्दि विवेक: स्वामी अशोकानंद

भक्ति धाम गौरी घाट में श्रीराम कथा

जबलपुर – मन में “प्रसन्नता” तो भगवान के भजन से प्राप्त होती है । प्रसन्नता ही मन की स्वस्थता है । राग-द्वेष-क्रोधादि मन के विकार है , जो मन को अस्वस्थ बनाते हैं । जब भीतरी स्वस्थता प्राप्त होती है,तब हरेक परिस्थिति में मन प्रसन्न -आनंदित रहता हैं ।शुध्द-पवित्र हृदय में प्रभु “विशेष शक्ति” प्रदान करते हैं । प्रभु बल जिसके पास है, उसे फिर थकान नहीं होती तथा असफलता का फिर प्रश्न ही नहीं हैं । भक्त की विवेक दृष्टि में प्रत्येक क्षण -ईश्वर की उपस्थिति मानकर व्यवहार करती हैं और यह विवेक “प्रभु कृपा” से प्राप्त सत्संग से ही हो सकता हैं । भक्त प्रभु स्मरण में तल्लीन रहता है ।

सीताराम चरण रति मोरे,
अनुदिन बढ़ऊ अनुगृह तोरे . सीता राम जी के चरणों में अनुराग रखने से सभी कष्टों का हरण हो जाता है। श्रीराम के नाम स्मरण और मनन से सकारात्मकता आती है,
भक्ति धाम गौरी घाट मे श्रीराम कथा में प्रथम दिवस परम पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने भक्तिधाम गौरीघाट में कहे।

आज पूजन अर्चन :जेठानंद खत्री, विजय पंजवानी, हरि करिश्मा शर्मा, जमनादास खत्री, प्रहलाद लालवानी , प्रिंस पंजवानी, वेदांत शर्मा, जय वाशानी, उमेश पारवानी, से शास्त्रोक्त विधि से
आचार्य श्री रामफल शास्त्री, पं आशीष लालू महाराज,
पुष्पराज तिवारी ने पूजन अर्चन किया।

भक्ति धाम गौरी घाट में अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक स्वामी अशोकानंद जी के मुखारविंद से
31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक आयोजित श्रीराम कथा में प्रतिदिन सायं 3 बजे से श्रृद्धालुओं से उपास्थिति का आग्रह किया है।

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