राम नाम जपकर होता है जीवन का उद्धार: स्वामी अशोकानंद

जबलपुर। भक्ति धाम गौरी घाट में चल रही श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने राम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि राम नाम जपने मात्र से जीवन का उद्धार हो जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव स्वयं राम नाम का जप करते हैं, क्योंकि यही नाम मोक्ष का द्वार खोल देता है।

स्वामी जी ने भगवान शिव और पार्वती के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान शिव कहते हैं — “जो परमात्मा बिना पैरों के चलता है, बिना कानों के सुनता है, बिना हाथों के अनगिनत कर्म करता है, मुख के बिना ही जगत के सारे रसों का आनंद लेता है, और बिना वाणी के भी सर्वोत्तम वक्ता है — वही प्रभु श्रीराम हैं।” उन्होंने कहा कि “हे पार्वती, जिनका नाम लेकर मरते हुए प्राणी भी मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं, वे प्रभु रघुनाथ स्वयं जगत के स्वामी हैं और सबके हृदय की भावना जानते हैं।”

स्वामी अशोकानंद जी महाराज

राम नाम की महिमा

स्वामी अशोकानंद जी ने कहा कि भगवान शिव ने भी पार्वती से कहा था —

“राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत् तुल्यं रामनाम वरानने॥”

इस मंत्र का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि “हे पार्वती, मैं निरंतर श्रीराम के नाम का जप करता हूँ और इस नाम की ध्वनि में ही परम आनंद का अनुभव करता हूँ। श्रीराम का नाम भगवान विष्णु के एक हजार नामों के बराबर है।” महाराज जी ने कहा कि जब स्वयं भूतभावन भगवान शंकर “राम राम” जपते हैं, तो हम सबको भी अपने जीवन में राम नाम का जप अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यही जीवन को पवित्र और सार्थक बनाता है।

दीपोत्सव और पूजन-अर्चन

श्रीराम कथा के दौरान आज दीपोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें भक्ति और प्रकाश का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर जेठानंद खत्री, विजय पंजवानी, हरि करिश्मा शर्मा, जमनादास खत्री, प्रहलाद लालवानी, प्रिंस पंजवानी, वेदांत शर्मा, जय वाशानी और उमेश पारवानी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पूजन-अर्चन का कार्य शास्त्रोक्त विधि से आचार्य श्री रामफल शास्त्री, पंडित आशीष लालू महाराज और पंडित पुष्पराज तिवारी द्वारा संपन्न किया गया। भक्तों ने भक्ति भावना और दीपों की रोशनी से पूरा परिसर आलोकित कर दिया।

कथा का आयोजन

भक्ति धाम गौरी घाट में स्वामी अशोकानंद जी महाराज के मुखारविंद से 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक श्रीराम कथा का आयोजन प्रतिदिन सायं 3 बजे से किया जा रहा है। स्वामी जी ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान श्रीराम की कथा का श्रवण करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं।

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