परिवार, समाज को संगठित करने का उपदेश है रामचरितमानस

दीपोत्सव में 5100 दीपों से जगमगाया भक्ति धाम

जबलपुर। रामचरित मानस में सेवा की शिक्षा निहित है। राम के नाम पर अधिकार स्थापित करने के लिए नियमित रूप से परिवार में मानस का पाठ होना चाहिए। परिवार को संगठित करने का पाठ मानस में है। नारी पूजनीय है — भगवान श्री राम ने नारी की पूजा की है। भारतीय वैदिक ऋचाओं में भी नारी की आराधना का उल्लेख मिलता है।

राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि का सार हैं। उन्होंने अपनी लीलाओं के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को संगठित करने का संदेश दिया। यही उपदेश देते हुए परम पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने भक्ति धाम गौरीघाट में चल रही श्रीराम कथा के पंचम दिवस में भक्तों को संबोधित किया।

श्रद्धालुओं ने किया पूजन-अर्चन और महाआरती

कार्यक्रम के दौरान पूजन-अर्चन और महाआरती में सुनील भागचंदानी, संदीप जैन गुड्डा, जेठानंद खत्री, विजय पंजवानी, हरि करिश्मा शर्मा, जमनादास खत्री, प्रहलाद लालवानी, विध्येश भापकर, प्रिंस पंजवानी, वेदांत शर्मा, जय वाशानी और उमेश पारवानी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

शास्त्रोक्त विधि से पूजन-अर्चन का संचालन आचार्य श्री रामफल शास्त्री, पं. आशीष लालू महाराज और पुष्पराज तिवारी ने किया।

5100 दीपों से भक्ति धाम में मना दीपोत्सव

भगवान श्री राम के अयोध्या आगमन की स्मृति में भक्ति धाम गौरी घाट परिसर में 5100 दीप प्रज्ज्वलित कर भव्य दीपोत्सव मनाया गया। दीपों की रौशनी से पूरा मंदिर परिसर आलोकित हो उठा और वातावरण में ‘जय श्री राम’ के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने भक्ति, भजन और आरती के साथ इस दिव्य उत्सव का आनंद लिया।

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