
पन्ना। प्रदेश का इकलौता जिला पन्ना है, जहां हीरा निकलता है। अब यहां के हीरे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिलने जा रही है क्योंकि पन्ना के हीरे को जीआई टैग मिल गया है। इसके साथ ही पन्ना का हीरा अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक कीमत एवं सर्टिफिकेट के साथ बेचा जा सकेगा, जिससे इसके कॉपीराइट करने की कोई भी संभावना नहीं होगी।
सीएम ने कहा- यह प्रदेश के लिए गौरव की बात
पन्ना के हीरे को जीआई टैग मिलने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि पन्ना के हीरे को जीआई टैग मिलना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। इससे पन्ना डायमंड अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमकेगा और पन्ना के युवाओं तथा कारीगरों को स्थानीय स्तर पर नए अवसर मिलेंगे। पन्ना जिले के हीरे सर्टिफाइड और प्रीमियम प्राकृतिक उत्पाद के रूप में विश्व बाजार में उपलब्ध होंगे और पन्ना के इन प्राकृतिक हीरों को ही पन्ना डायमंड के नाम से बेचा जा सकेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।
दो वर्ष पूर्व किया गया था आवेदन
2 वर्ष पूर्व जीआई टैग के लिए किया था आवेदन
तत्कालीन कलेक्टर संजय कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला खनिज विभाग द्वारा 7 जून 2023 को जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया था। आज इसे जीआई टैग मिल गया है। पन्ना के हीरे को क्लास 14 – नेचुरल्स गुड्स की श्रेणी में जीआई टैग मान्यता प्रदान की गई है। इस उपलब्धि के कारण पन्ना से निकलने वाले हीरे की चमक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगेगी।
जीआई टैग मिलने से होंगे बड़े फायदे
पन्ना के हीरे को जीआई टैग मिलने के कारण अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पन्ना के हीरे की अलग पहचान बनेगी. उदाहरण से समझें जैसे यदि कोई व्यक्ति मुंबई में पन्ना का हीरा खरीदना चाहता है और वह 3 लाख रुपए कैरेट में क्रय करता है। जांच में पता चलता है कि वह हीरा अफ्रीकन डायमंड निकल जाता है, जिसकी कीमत 12,000 रुपए कैरेट है। अब यह ऐसा नहीं होगा. क्योंकि यदि कोई पन्ना का हीरा खरीदता है, तो उसे जीआई टैग सर्टिफिकेट भी मिलेगा। इसमें यह जानकारी लिखी होगी कि हीरा किस खदान से निकाला है, उसका वजन कितना है और किस क्वालिटी का हीरा है।