Maharashtra School Jabalpur: अखिल भारतीय पूर्व छात्र दो दिवसीय सम्मेलन का समापन

जबलपुर। महाराष्ट्र विद्यालय राइट टाउन जबलपुर शहर की प्रतिष्ठित एवं आदर्श शाला है। 1925-26 के ब्रिटिश काल में स्थापित यह शाला अपनी स्थापना का गौरवपूर्ण शताब्दी वर्ष मना रही है। इस उपलक्ष्य में आयोजित अखिल भारतीय पूर्व छात्र दो दिवसीय सम्मेलन के समापन अवसर के पहले सत्र में पूर्व छात्रों द्वारा शाला का भ्रमण किया गया। शालेय प्रार्थना के पश्चात छात्र अपने-अपने कक्षाओं में पहुंचे और भावुक होकर अपने अनुभव साझा किए।

तबलावादन और शौर्यगाथा का प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तबलावादक तालमणी पंडित किरण देशपांडे द्वारा त्रिताल में सोलो वादन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने “तनिक सुनरी सत वचन अब, कल्पनाही मन की मन वासना” बंदिश सुनाई। तबले पर रवी परांजपे तथा हार्मोनियम पर विजय चांदोरकर ने संगत की।

इसके पश्चात श्रीमती माधुरी घाटे द्वारा प्रोजेक्टर पर रानी दुर्गावती की शौर्यगाथा का अद्भुत वर्णन किया गया। इसके बाद गीत रामायण पर गौरी साने द्वारा निर्देशित नृत्य-नाटिका का मंचन हुआ।

मुक्त मंच और अनुभव साझा

अभय गोरे द्वारा मुक्त मंच का संचालन किया गया जिसमें संतोष गोडबोले, अभय गोरे, शरद वागळे, राम कणीकर, डॉ. सुलभा पुणेकर, संध्या पुराणिक, लेफ्टिनेंट कर्नल दिलीप चिंचणीकर, विनायक मराठे ने अपने शालेय जीवन के अनुभव व्यक्त किए।

मराठी मातृभाषा पर परिसंवाद

“मराठी मातृभाषा का जीवन में महत्व” विषय पर आयोजित परिसंवाद में चंद्रशेखर पटवर्धन, दीपक मुंजे, सरोज रानडे पेठकर, दीपा नाडकर सुळे ने अपने महत्वपूर्ण विचार रखे। मंच सज्जा एवं वेशभूषा सुनील परांजपे और भारती परांजपे की रही।

न्यूझीलैंड से डॉ. अशोक अभ्यंकर और अमेरिका से गिरीश चिटणीस भी इस आयोजन में शरीक हुए।

आभार और सहयोग

श्री सुरेश मुंजे एवं रवींद्र परांजपे द्वारा सभी अतिथियों, कलाकारों, देश-विदेश से पधारे पूर्व छात्र, प्रिंट मीडिया, नगर के समाचार पत्र, सुरेश पागे, इंडियन कॉफी हाउस, अजमिरें टेंट हाउस आदि के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

आयोजना को सफल बनाने में राजा हिरस्कर, राहुल उज्जैनकर, सदानंद गोडबोले, वर्षा दांडेकर, हेमंत सावरकर, दिलीप कुलकर्णी, रेखा गोडसे, मुरलीधर पाळंदे, रमेश खडसन, प्रकाश वैद्य, पद्मजा रानडे, अरुण गायकी, संजय आपटे, सुधीर बेडेकर, सुनील किबे, शाम कुलकर्णी, प्रकाश वाते, मोहन देशपांडे, मुकुंद पांडे, अनिल दांडेकर, राजेंद्र पराते तथा पूर्व छात्रों का सहयोग रहा।

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