
जबलपुर। गीता मात्र पुस्तक नहीं, माँ की तरह ही सबको व्यवस्थित जीवन जीने की शिक्षा देती है — यह उद्गार जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने नरसिंह मंदिर में आयोजित गीता जयंती समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गीता संपूर्ण मानवता का जीवन दर्शन है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में कर्म, भक्ति और ज्ञान के साथ निष्काम भाव से कार्य करने की शिक्षा दी, जिसका अनुकरण विश्व के महान वैज्ञानिकों व मनीषियों ने किया है।

60 वर्षों की परंपरा का सान्निध्य
नरसिंह मंदिर में साकेत वासी श्रीरामचंद्र शास्त्री द्वारा स्थापित गीता परिषद की 60 वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्रीमद् जगदगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर ने इस गीता जयंती को वृहद रूप प्रदान किया। समारोह में श्रीराम चंद्र शास्त्री वेद वेदान्त विधालय गीता धाम के बटुकों ने सस्वर श्रीमद् भागवत गीता के अठारह अध्यायों का पाठ किया।
विशेष पाठ—बालिकाओं का समर्पण
समारोह में पाँच बालिकाओं ने संपूर्ण गीता का मुखाग्र कंठस्थ पाठ प्रस्तुत किया, जिसे श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर सुना। नगर के मनीषियों ने गीता के महात्म्य पर उद्बोधन दिये और गीता के जीवनदर्शन पर प्रकाश डाला।
षोडशोपचार पूजन, आरती व महाप्रसाद
श्रीगिता जी की षोडशोपचार पूजन-अर्चन और आरती के साथ कार्यक्रम का धार्मिक समापन हुआ तथा उसके उपरांत महाप्रसाद वितरित किया गया। पूरे कार्यक्रम में भक्तिभाव और अनुशासित अनुक्रम का वातावरण बना रहा।
मुख्य अतिथियों व पदाधिकारियों की उपस्थिति
समारोह में डंडी स्वामी कालिकानन्द सरस्वती जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी राधे चैत्यन जी महाराज, नगर पंडित सभा के अध्यक्ष पंडित वासुदेव शास्त्री, संतोष शास्त्री, हनुमानदास जी महाराज, स्वामी बालक दास महाराज, आचार्य संतोष शास्त्री सहित अनेक धार्मिक गणमान्य उपस्थित रहे।
संस्था व समाज के प्रतिनिधियों की भागीदारी
श्री सनातन धर्म महासभा के अध्यक्ष श्याम साहनी, अशोक मनोध्याय, गुलशन मखीजा, हरीश सभरवाल, पं. राममूर्ति मिश्रा, संदीप जैन, रजनी यादव, मुन्ना पांडेय, शिव उपाध्याय, राजेंद्र इंदु प्यासी, लोकराम कोरी, भोलाराम खत्री, दीपक साहू, विष्णु पटेल, मनोज नारंग, जगदीश साहू, संदीप मिश्रा, मनोज शर्मा, मनीष पोपली, विजय सरागवी तथा नरसिंह मंदिर गीता धाम व सनातन धर्म महासभा के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
समापन टिप्पणी
कार्यक्रम ने गीता के सार्वत्रिक संदेश—कर्म, भक्ति और ज्ञान—को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आयोजन की भव्यता और धार्मिक अनुशासन की प्रशंसा की तथा गीता के उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।