श्री दत्त जयंती सप्ताह: भक्तिमय रुद्राभिषेक, कीर्तन और कथा से साकार हुआ आयोजन

जबलपुर। श्री दत्त भजन मंडवल द्वारा आयोजित श्री दत्त जयंती सप्ताह के अंतर्गत आज का दिवस अत्यंत भक्तिमय और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक, सायं आरती व कीर्तन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और आध्यात्मिक अनुभूति साझा की।

प्रातः रुद्राभिषेक

आज प्रातः चांदी की दिव्य बालरूपी दत्त मूर्ति का रुद्राभिषेक श्रध्दाभाव से श्री व सुबोध नाईक द्वारा विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित भक्त इस पावन कार्य को देखकर भावविभोर रहे।

सायं आरती व विशिष्ट उपस्थितियां

सायं आरती में महाराष्ट्र शिक्षण मंडळ, महाराष्ट्र व्यायाम शाळा, महाराणी लक्ष्मी बाई भजन मंडळ, बृहन् महाराष्ट्र मंडळ नई दिल्ली एवं रहली पंढरपूर के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आरती में प्रमुख रूप से डॉ. राजेश वर्मा (कुलगुरु, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय), डॉ. अल्पेश चतुर्वेदी (शासकीय प्राचार्य, महाकौशल), अखिलेश जैन, पार्षद प्रतिमा भांपकर व सोनिया रंजीत सिंह शामिल हुए।

कीर्तन व संदेश

आज के कीर्तन में ह.भ.प. प्राची व्यास ने संत तुकाराम के श्लोक — “आपुला तो एक देव करुनी घ्यावा” — के माध्यम से बताया कि जब मनुष्य भगवान को अपना बना लेता है तो उसे दिव्य, स्थायी सुख प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि भक्तिमार्ग और नामजप से जीवन में स्थिरता आती है।

कथा — मच्छिंद्रनाथ और गोरक्षनाथ

कीर्तन के उत्तरार्ध में मच्छिंद्रनाथ व गोरक्षनाथ की भक्ति-प्रसंग कथा प्रस्तुत की गई। कथा में बताया गया कि कैसे एक साधारण स्त्री ने निष्ठापूर्वक सेवा कर माता अन्नपूर्णा का स्थान प्राप्त किया — संदेश स्पष्ट था: भक्ति और सेवा से जीवन धन्य बनता है।

भक्ति का सार और उपस्थित भक्त

कार्यक्रम के वक्त वक्ता ने कहा कि नाम जपना, सद्गुरु उपदेश का पालन और भक्तिमार्ग पर चलना न केवल व्यक्तिगत पुण्य बढ़ाता है, बल्कि समग्र सृष्टि के हित में भी योगदान देता है। आज के कार्यक्रम में दिलीप सप्रे, स्नेहा आठले, मनीषा भावे, श्रीपाद परांजपे, मनीष वैद्य, रंजना वर्तक, सारंग भिड़े, अरुण रुद्र, अशोक मोडक, सुरेश बेहरे सहित अन्य भक्त भी उपस्थित थे।

Back to top button