
नईदिल्ली। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर लोकसभा में सोमवार को विशेष चर्चा हुई। इसी तरह चुनाव सुधार पर बुधवार को विशेष चर्चा हुई। दोनों ही चर्चाओं में पक्ष विपक्ष में काफी छींटाकशी हुई। दोनों ही ओर से राजनीतिक निशाने साधे गए। वंदेमातरम पर बोलते हुए सत्ता पक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कमान संभाली और कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। वहीं चुनाव सुधार पर लोकसभा में चर्चा करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा वहीं विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सत्ता पक्ष से सवाल किए जिसका जवाब गृहमंत्री अमित शाह ने दिया। हालात यह हो गई कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के भाषण के दौरान कांग्रेस ने सदन से बर्हिगमन कर दिया।
सत्ता पक्ष ने ये कहा
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रगीत वंदेमातरम पर चर्चा करते हुए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वंदेमातरम के टुकड़े कर दिए। कांग्रेस वंदे मातरम के बंटवारे के लिए झुकी इसलिए कांग्रेस को भारत के बंटवारे के लिए झुकना पड़ा। कांग्रेस की नीतियां वैसी की वैसी ही हैं। मुस्लिम लीग के आगे कांग्रेस ने घुटने टेके। वह आइएनसी से चलते चलते मुस्लिम माओवादी कांग्रेस हो गई है।
विपक्ष के आरोप
राष्ट्रगीत वंदेमातरम पर लोकसभा में चर्चा करते हुए सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष यह चर्चा पश्चिम बंगाल में चुनाव के कारण कर रही है। सरकार देश के जरूरी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस के अधिवेशन में वंदेमातरम गीत कांग्रेस ने गाया था। पीएम मोदी ने नेहरू की चिट्ठी का जिक्र तो किया लेकिन इसके पहले नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने उन्हें जो पत्र लिखे थे उसका जिक्र नहीं किया। इस पत्र में उन्होंने गुरुवार रवींद्रनाथ टैगोर से मिलने की बात लिखी थी। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन में भाजपा के राजनीतिक पूर्वज कहां थे।
चुनाव सुधार पर चर्चा
लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा हुई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक दिन पहले सत्ता पक्ष से तीन सवाल पूछे थे। जिसका जवाब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को सदन में दिया। राहुल गांधी ने पूछा कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से सीजेआई को क्यों हटाया गया। 45 दिन बाद सीसीटीवी डिलीट क्यों किया जा रहा है। आयुक्त को इम्युनिटी क्यों दी गई।
अमित शाह का जवाब
अमित शाह ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि पिछले 73 साल तक चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का कानून नहीं था। 1950 से 1979 तक प्रधानमंत्री ही आयुक्त चुनते थे। 1979 -91 तक आयोग बना। इस दौरान पीएम की सिफारिश पर आयुक्त की नियुक्ति होती थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए। जब तक कानून नहीं बना तब तक सीजेआई, पीएम और सदन में नेता प्रतिपक्ष कमेटी में शामिल रहे। कानून बनने के बाद सीजेआई कमेटी से अलग हो गए पीएम, नेता प्रतिपक्ष और केंद्रीय मंत्री कमेटी में शामिल रहे।
दूसरे सवाल का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि जनप्रतिनिधि कानून 1991 में बना था। जिसमें कहा गया है कि 45 दिन बाद चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती है। 45 दिन बाद जब कोई आपत्ति नहीं दी जा सकती तो सीसीटीवी कैमरे क्यों रखे जाएंगे। यदि कोई आपत्ति करता है तो वह कोर्ट में जाकर संबंधित क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरे को संरक्षित करने की मांग कोर्ट से कर सकता है।
तीसरे सवाल का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 में बना था। उसमें ही आयोग को इम्युनिटी दी गई थी। नए कानून में पुराना ही प्रावधान है।
कांग्रेस का बर्हिगमन
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने घुसपैठिये की बात की तो कांग्रेस ने सदन से बर्हिगमन कर दिया।