
जबलपुर। रामचरितमानस को वेद भी कहा गया है। रामचरितमानस निर्मल और पवित्र है। संतों के जीवन का यह आधार है, प्राण है। इससे संत जीवित रहते हैं। उपनिषद हमारा शीतल प्रकाश है। भगवत गीता हमारा विश्वास है। श्रीमद् भागवत गीता में भगवान का पूर्ण अवतार है वह हमारी तलाश है। अभी हमें मिले नहीं। रामचरितमानस व्यास पीठ यह साधुओं की स्वास पीठ है। रामचरितमानस सबके लिए है पूरे विश्व के लिए है। शिवजी भी यही कहते हैं। उक्त आशय के उद्गार राम कथा के सातवें दिन शुक्रवार को व्यासपीठ से अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक मोरारी बापू ने व्यक्त किए।

सुंदर आत्मा और राम का सौंदर्य
उन्होंने कहा कि जब सबकी आत्मा सुंदर होती है तो राम तो परमात्मा है वह कितने सुंदर होंगे। सुंदर आत्मा कई साधकों की सुंदरता का परिचय कराती है। हम अपनी आत्मा का सौंदर्य तो भूल चुके हैं। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि जिस तरह हमारे राम सुंदर हैं इस तरह श्री कृष्णा भी बहुत सुंदर है। कृष्ण भी परमात्मा है।
महापुरूष का स्पर्श ही पर्याप्त
बापू ने कहा कि महापुरूष का एक स्पर्श बहुत काम करता है। भगवान राम ने अहिल्या को तो चरण से स्पर्श किया। आप सब इस मार्ग में जो दीक्षा लेते हैं तो आज्ञा चक्र पर वो दीक्षा देते तो टच ही तो करते थे ना। फिर आप इसी परंपरा में आप करते हैं स्पर्श। तुलसीदास जी लिखते हैं परसत कर्म बिलाही, बुद्ध पुरुष हमें छुए ना तो हमारे जन्म-जन्म के कर्म के जंजाल खत्म कर देता है।
रामायण के पात्रों की इज्जत करो
मैं आपसे ये कहने आया हूं कि कई लोग ऐसा ही मानते कि रामचरित मानस में क्या है। रामायण यानी क्या? बात बात में कहते है ना भाई रामायण हो गई। रामायण की इज्जत करो। उसको फनी मत बनाओ। रामायण के पात्रों की भी इज्जत करो। कभी गुरु के चरणों में बैठकर राम कथा सुनी है। कभी इनके रहस्यों को आत्मसात करो तो पता लगे कि राम कथा क्या है। जिस कथा को शिव गाते हैं तो हम किस खेत की मूली हैं। यह सभी ग्रंथों का रस है। भगवान तो लोगों का उद्धार करते हैं।