VIDEO: बालाघाट में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप के दर्शन, संत ने बताए रहस्य

बालाघाट। सनातन आस्था के महान प्रतीक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़ी एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कथा एक बार फिर भक्तों के समक्ष जीवंत हो उठी। सतयुग में भगवान चंद्र द्वारा स्थापित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को भारत का प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह ज्योतिर्लिंग भूमि से लगभग तीन फीट ऊंचाई पर स्थित था और इसके निर्माण में प्रयुक्त पत्थर को लेकर किए गए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि वह धातु इस भू-लोक पर उपलब्ध नहीं है।

रुद्र पूजा में संत शिव तेज जी ने साझा किए दुर्लभ तथ्य

यह महत्वपूर्ण जानकारी गुरुवार को काली पुतली चौक के समीप स्थित प्राचीन संकट मोचन हनुमान मंदिर में आयोजित रुद्र पूजा के अवसर पर संत श्रीश्री रविशंकर जी के शिष्य ब्रह्मचारी शिव तेज जी ने दी। वे इस अवसर पर भगवान सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप से जुड़े दो अवशेष शिवलिंग भक्तों के दर्शन हेतु लेकर बालाघाट पहुंचे थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस दुर्लभ अवसर पर दर्शन और पूजन का लाभ लिया।

आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने 18वीं बार में तोड़ा था ज्योतिर्लिंग

संत शिवतेज जी ने बताया कि भगवान शिव की अपार भक्ति और शक्ति के प्रतीक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर आक्रमणकारी महमूद गजनवी की कुदृष्टि पड़ी थी। उसने सोमनाथ पर कुल 17 बार आक्रमण किए और 18वीं बार में ज्योतिर्लिंग को खंडित कर दिया। इस दौरान कुछ पुजारियों ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप को सुरक्षित निकाल लिया।

एक हजार वर्षों तक गुप्त रूप से होती रही पूजा

बताया गया कि ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप को पुजारियों ने लगभग एक हजार वर्षों तक गुप्त रूप से सुरक्षित रखा और नियमित पूजा-अर्चना करते रहे। वर्ष 1924 में हुई एक भविष्यवाणी के आधार पर इस दिव्य धरोहर को बैंगलोर निवासी संत शंकर को सौंपा गया, जिससे आगे मंदिर स्थापना की प्रक्रिया पूर्ण की जा सके।

शंकराचार्य चंद्रशेखरन सरस्वती की ऐतिहासिक भविष्यवाणी

संत शिवतेज जी के अनुसार, वर्ष 1924 में दक्षिण भारत के पुजारी परिवार ने कांची पीठ के शंकराचार्य चंद्रशेखर सरस्वती से संपर्क किया था। उस समय शंकराचार्य ने भविष्यवाणी की थी कि देश की स्वतंत्रता के बाद और जब राम मंदिर का निर्माण पूर्ण हो जाएगा, तब यह मूल स्वरूप संत शंकर को सौंपा जाए। इसके पूर्व 100 वर्षों तक गुप्त पूजा की जाएगी। वर्ष 2025 में यह अवधि पूर्ण होने के साथ ही शंकराचार्य की भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई।

मध्यप्रदेश में दो टीमों द्वारा कराए जा रहे दर्शन

संत ने जानकारी दी कि कुंभ प्रारंभ होने से पहले जनवरी माह में पुजारी परिवार की अंतिम पीढ़ी के सीतारमन शास्त्री ने 11 एकादश शिवलिंग श्रीश्री रविशंकर जी को सौंपे। कुंभ के दौरान संतों से विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि देशभर में आम श्रद्धालुओं को इन मूल स्वरूपों के दर्शन कराए जाएं। इसी क्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में यात्राएं निकाली जा रही हैं।

बालाघाट से जबलपुर तक होगी यात्रा

मध्यप्रदेश में दो टीमें इस आध्यात्मिक यात्रा का संचालन कर रही हैं, जिनमें से एक टीम बालाघाट पहुंची है। यहां संकट मोचन हनुमान मंदिर में शिवलिंगों की विधिवत रुद्र पूजा संपन्न हुई। इसके पश्चात यह यात्रा विभिन्न स्थानों से होते हुए जबलपुर पहुंचेगी। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और स्वयं को पुण्य का भागीदार बनाया।

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