
दमोह/हटा। वर्तमान की भागदौड़ भरी जीवनशैली में स्वास्थ्य, सक्रियता और खुशहाली के लिए योग और अध्यात्म की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य के साथ गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग की हटा इकाई द्वारा बालाजी कंस्ट्रक्शन हॉल में आयोजित 6 दिवसीय ‘हैप्पीनेस कोर्स’ कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
अस्तित्व के सातों स्तरों पर किया गया कार्य
संस्था के प्रशिक्षक आशुतोष सुहाने ने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि जीवन को सकारात्मक और तनाव मुक्त रखने के लिए शरीर, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, श्वास और आत्मबोध पर कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने साधना, सेवा, सत्संग, प्राणायाम, योग, ध्यान और ज्ञान की कुंजियों के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखाई।

योग और अध्यात्म का महत्व बताया
प्रशिक्षक आशुतोष सुहाने ने बताया कि योग हमें स्वस्थ रखता है, जबकि अध्यात्म जीवन में सृजनात्मकता और सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करता है। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास से व्यक्ति मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त कर सकता है।
प्रतिभागियों ने साझा किए अपने अनुभव
शिविर के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए, जो उनके खिले हुए चेहरों से स्पष्ट झलक रहे थे। अशोक सोनी ने बताया कि इस कार्यशाला में उन्हें शारीरिक एवं जोड़ों के दर्द में विशेष लाभ मिला। शरद अठ्याने ने कहा कि उनका मन पहले से अधिक एकाग्र और फोकस्ड हुआ है।
आयुषी ने जीवन में नए अवसर और सकारात्मकता महसूस होने की बात कही। आस्था सोनी ने बताया कि उनकी ओवरथिंकिंग की समस्या समाप्त हुई और गुस्से पर नियंत्रण आया है। वाशु गुप्ता ने व्यापार प्रबंधन और लोगों से व्यवहार करने की कला में सुधार की बात कही।
राकेश अग्रवाल ने मन में अभूतपूर्व शांति का अनुभव बताया, वहीं राजा राय ने कहा कि उन्हें आलस्य से मुक्ति मिली और कार्यों में नई स्फूर्ति आई है।
सेवाभाव से कार्यक्रम को मिला सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में वरिष्ठ स्वयंसेवक राजबहादुर पटेल, उदयभान पटेल, गौरव सिंघई, अभिषेक सुहाने, अनिल पटेल, आनंद नामदेव, शरद अठ्या, मनोज चौरसिया, भागवत असाटी, शोभित फौजदार और शाश्वत सुहाने की सराहनीय भूमिका रही।
कार्यशाला के लिए शिवचरण पटेल ‘बड्डा’ द्वारा निःशुल्क हॉल उपलब्ध कराकर सेवा सहभागिता की गई। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने योग और अध्यात्म को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।