
जबलपुर। वैदिक ज्योतिष अनुसार समय-समय पर चंद्र और सूर्य ग्रहण पड़ते हैं, जिनका प्रभाव मानव जीवन और देश-दुनिया पर देखने को मिलता है। 3 मार्च मंगलवार की शाम फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन ग्रस्तोदित खण्ड चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। यह चंद्रग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, अफ्रीका तथा उत्तर और दक्षिण अमेरिका के पूर्वी क्षेत्रों के साथ भारत में भी दृश्य रहेगा।
सिंह राशि में बनेगा विशेष ग्रहयोग
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद् पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि यह खण्ड चंद्रग्रहण सिंह राशि में लगेगा, जहां पहले से ही केतु विराजमान हैं। इस प्रकार केतु और चंद्रमा की युति सिंह राशि में रहेगी। वहीं सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु की युति कुम्भ राशि में रहेगी। दोनों राशियां समसप्तक भाव में रहकर एक-दूसरे पर सप्तम दृष्टि डालेंगी, जिसका प्रभाव देश-दुनिया पर दिखाई देगा।
प्राकृतिक और वैश्विक प्रभाव की संभावना
ज्योतिषीय गणना के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा और प्राकृतिक आपदाएं घटित हो सकती हैं। राजनीतिक एवं भौगोलिक बदलाव, मौसम का प्रतिकूल प्रभाव तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियां भी बढ़ सकती हैं। चंद्रग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर देखने को मिलेगा।
इन राशियों पर रहेगा विशेष प्रभाव
पंडित सौरभ दुबे के अनुसार सिंह, कर्क, कुम्भ, कन्या और मकर राशि वालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं मिथुन, तुला, वृश्चिक, मीन और मेष राशि वालों पर शुभ प्रभाव देखने को मिलेगा।
ग्रहण का समय और सूतक काल
भारतीय समयानुसार 3 मार्च 2026 को दोपहर 3:29 बजे स्पर्श काल, शाम 6:12 बजे मध्यकाल तथा रात्रि 7:02 बजे मोक्ष होगा। चूंकि चंद्रोदय शाम 6:18 बजे होगा, इसलिए ग्रहण का प्रभाव इसी समय से दृश्य माना जाएगा। यह ग्रहण लगभग 44 मिनट तक दिखाई देगा।
ग्रहण का सूतक मंगलवार 3 मार्च को सुबह 9:18 बजे से प्रारंभ होगा। बालक, वृद्ध और रोगियों के लिए सूतक दोपहर 3:17 बजे से मान्य रहेगा।
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां
ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को सुई, कैंची, चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ग्रहण को नग्न आंखों से देखने से बचें। सूतक लगने के बाद गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, विशेषकर नकारात्मक स्थानों से दूर रहना चाहिए।
क्या करें और क्या न करें
ग्रहण काल में धार्मिक कृत्य, श्राद्ध, चावल, दूध, दही, वस्त्र और सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है। ग्रहण के समय जपा गया मंत्र सिद्धिप्रद होता है।
इस दौरान पूजा, हवन, यज्ञ, मूर्ति स्थापना, विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। सूतक काल में भोजन पकाना या खाना वर्जित है। बाल कटवाना, नाखून काटना, दाढ़ी बनाना या अन्य शारीरिक शुद्धिकरण के कार्य भी नहीं करने चाहिए।
भगवान का नाम जपें, गुरुमंत्र का जाप करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “महामृत्युंजय मंत्र” का जाप करना लाभकारी रहेगा।