
जबलपुर। कलियुग में नाम जप का विशेष महत्व है। हर युग में भक्तों द्वारा भगवान के नाम स्मरण से प्रसन्न होकर श्रीहरि ने अवतार लिया और आसुरी शक्तियों का नाश करते हुए असुरों को भी मोक्ष प्रदान किया है।
पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व
पुरुषोत्तम मास भगवान श्रीहरि विष्णु का पूर्ण स्वरूप माना जाता है। इस मास में भक्ति और नाम स्मरण करते हुए तीन वर्षों के लिए ऊर्जा संग्रह करना चाहिए। पुरुषोत्तम मास में श्रीमद् भागवत कथा महापुराण का श्रवण पितरों को तृप्त करता है और हमारे पुण्यों की वृद्धि करता है।

सकारात्मक ऊर्जा का होता है संचार
भगवान के उत्सवों में उत्साह और उमंग से भाग लेकर पुण्यार्जन करने से आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
भागवत कथा के चतुर्थ दिवस दिया संदेश
उक्त उद्गार श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉक्टर स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज ने व्यक्त किए। वे श्री आदर्श केशरवानी वैश्य समाज संगठन द्वारा 14 मई से 21 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस श्रीहरि नारायण के श्रीराम, कृष्ण और नरसिंह सहित अवतारों की कथा में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दौरान दुर्गा मंदिर कैलाशपुरी हाथीताल जबलपुर में संबोधित कर रहे थे।
व्यास पीठ पूजन और आरती
इस अवसर पर श्रीमद्भागवत महापुराण में व्यास पीठ का पूजन-अर्चन एवं आरती यजमान कर्पूरचंद्र केशरवानी सहित श्री हरिबंश निर्मला गुप्ता, प्रशांत गुललन दुबे, पार्षद निशा राठौर, नारायण, शान्ती गुप्ता, श्रीहरी शंकर, कान्ती देवी गुप्ता, कुंजबिहारी गुप्ता, हिन्छलाल गुप्ता, शिवदीन गुप्ता (ज्ञानी), रामरूप, कन्हैया लाल गुप्ता, मूलचन्द्र गुप्ता, केदारनाथ गुप्ता, रामदिनेश सेन एवं श्रीमती सुभद्रा सेन ने किया।