
जबलपुर। हरे कृष्णा आश्रम भेड़ाघाट द्वारा प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष 14वें आयोजन में गंगा दशहरा के पूर्व प्रातःकाल 900 फुट लंबी चुनरी से बाणगंगा नदी, नर्मदा मैया और सरस्वती मैया का भव्य श्रृंगार किया गया। विधिवत पूजन, दुग्ध अभिषेक, महाआरती और भंडारे का आयोजन भी किया गया।
बाणासुर की कथा से जुड़ा है बाणगंगा का इतिहास
आश्रम के संस्थापक स्वामी रामचंद्र दास जी महाराज ने बताया कि बाणासुर नामक राक्षस ने इस क्षेत्र में तपस्या कर करोड़ों शिवलिंगों की पूजा की थी। वह सभी शिवलिंग गंगा मैया में विसर्जन करने ले जा रहा था, तब भगवान शंकर ने उसे आशीर्वाद दिया कि जहां से वह बाण मारेगा, वहीं से गंगा का उद्गम होगा।
बाढ़गंगा से बना बाणगंगा नाम
बताया गया कि उसी स्थान पर बाणासुर के बाण से गंगा का प्राकट्य हुआ, जिससे इसका नाम बाढ़गंगा पड़ा और कालांतर में इसे बाणगंगा कहा जाने लगा। यहां नर्मदा मैया के शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती, क्योंकि मान्यता है कि उनका पूजन पहले ही बाणासुर द्वारा किया जा चुका है।
सुख-समृद्धि और स्वच्छता का संदेश
शरद अग्रवाल ने बताया कि नदियां स्वच्छ रहें, क्षेत्र में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहे तथा नशा मुक्ति का संदेश देने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जाता है।
महाआरती में शामिल हुए श्रद्धालु
इस अवसर पर नर्मदा महाआरती के संस्थापक डॉ. सुधीर अग्रवाल, जय किशन गुप्ता एडवोकेट, सुषमा शंकर पटेल, संकीर्तनाचार्य श्याम मनोहर पटेल, विनोद दीवान, संकीर्तनाचार्य सुरेश विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, शिवकुमार पटेल, मनोज गुलाबबानी, कैलाश विश्वकर्मा, दुर्गा पटेल, गुड्डू नेता, छन्नू राम पटेल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।