रक्षाबंधन से पहले चीनी के दाम बढ़े, मिठाइयों की कीमत में 30 रुपये तक बढ़ोतरी की आशंका

कई शहरों में चीनी 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंची, त्योहारी मांग से बढ़ी कारोबारियों की चिंता

नई दिल्ली। रक्षाबंधन के त्योहार से पहले चीनी के बढ़ते दामों ने आम लोगों के साथ मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा और त्योहार से ठीक पहले चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।

बाजार रिपोर्टों के मुताबिक कई शहरों में खुदरा चीनी का भाव करीब 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कुछ बाजारों में पिछले एक महीने के दौरान कीमतों में लगभग 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने के साथ ही मिठाई, पेठा और अन्य चीनी आधारित उत्पाद बनाने वालों की लागत भी बढ़ गई है।

मिठाइयों की कीमत बढ़ने की आशंका

व्यापारियों के अनुसार रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य मीठे पकवानों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में यदि चीनी के दाम ऊंचे बने रहते हैं तो इसका असर मिठाइयों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। कुछ कारोबारियों ने लागत बढ़ने के कारण मिठाइयों के दाम में 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक वृद्धि की आशंका जताई है।

उपलब्धता और त्योहारी मांग का असर

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे बाजार में उपलब्धता, उत्पादन और त्योहारी मांग को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। केंद्र सरकार ने भी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं। बड़े उपभोक्ताओं के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन की गई है। इसके अलावा कीमतों पर नियंत्रण और घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए शुल्क-मुक्त आयात जैसे विकल्पों पर भी विचार किया गया है।

इथेनॉल उत्पादन की भूमिका पर भी चर्चा

चीनी के दाम बढ़ने के कारणों को लेकर इथेनॉल उत्पादन की भूमिका पर भी चर्चा चल रही है, हालांकि केंद्र सरकार ने हालिया मूल्य वृद्धि को केवल इथेनॉल से जोड़ने से इनकार किया है। सरकार के मुताबिक उत्पादन में कमी और मांग में बढ़ोतरी जैसे कई कारकों का कीमतों पर असर पड़ा है।

त्योहारी सीजन में कीमतों पर नजर

रक्षाबंधन के साथ आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए अब लोगों की नजर बाजार में चीनी की उपलब्धता और आने वाले दिनों के भाव पर है। यदि आपूर्ति बढ़ती है तो कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन मांग में तेजी जारी रहने पर मिठाई और घरेलू खर्च दोनों पर इसका असर पड़ सकता है।

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