
पुणे। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्राओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की पहचान केवल किसी की बेटी, पत्नी या मां के रूप में नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी स्वतंत्र पहचान और निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए।

महिलाओं की स्वतंत्र पहचान का मुद्दा उठाया
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मनुस्मृति में महिलाओं की स्थिति से जुड़े विचारों का उल्लेख करते हुए इसे पितृसत्तात्मक मानसिकता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को किसी पुरुष की संपत्ति समझने की मानसिकता बदलने की जरूरत है। उन्होंने छात्राओं से ऐसी सोच के खिलाफ आवाज उठाने और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का आह्वान किया।
लैंगिक भेदभाव पर भी रखी बात
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन में लड़के अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं तो उस पर उतनी आपत्ति नहीं जताई जाती, लेकिन लड़कियों के ऐसा करने पर अलग नजरिया अपनाया जाता है। राहुल ने इसे लैंगिक भेदभाव और पितृसत्तात्मक सोच का उदाहरण बताया।
छात्राओं ने सामने रखीं अपनी समस्याएं
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्राओं ने भी राहुल गांधी के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इनमें महिलाओं की सुरक्षा, यौन उत्पीड़न, शिक्षा के लिए आर्थिक कठिनाइयां और सामाजिक दबाव जैसे मुद्दे शामिल रहे। राहुल गांधी ने कहा कि असुरक्षा और सामाजिक प्रतिबंधों के कारण महिलाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।
बराबरी और सम्मान के अवसर पर जोर
राहुल गांधी ने महिलाओं को देश की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि भारत को ऐसा समाज बनाना होगा जहां महिलाओं को बराबरी का अवसर और सम्मान मिले। पुणे का यह कार्यक्रम राहुल गांधी के युवाओं और छात्राओं के बीच संवाद बढ़ाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा ने कार्यक्रम को लेकर साधा निशाना
हालांकि, कार्यक्रम को लेकर भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा और राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम को राजनीतिक प्रदर्शन करार दिया। इससे पुणे का यह आयोजन राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है।