
पन्ना। श्री 5 पद्मावतीपुरी धाम, पन्ना में प्रतिवर्षानुसार परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ अंतर्राष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव 2 अक्टूबर 2025 से 11 अक्टूबर 2025 तक बड़े ही हर्षोल्लास के साथ आयोजित होने जा रहा है। इस दस दिवसीय महोत्सव में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु सुंदरसाथ पन्ना पहुंचेंगे।
रविवार को श्री प्राणनाथ धर्मशाला में श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर ट्रस्ट द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में विद्वान गुरुजनों—पंडित खेमराज शर्मा और पंडित श्याम बिहारी दुबे ने कार्यक्रम का विवरण विस्तार से बताया। भूमिका न्यासी डीके दुबे द्वारा रखी गई। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी महोत्सव भक्तिभाव और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

शरद पूर्णिमा का मुख्य आयोजन
2 अक्टूबर को दशहरा से महोत्सव का शुभारंभ होगा, जो लगातार 11 अक्टूबर पंचमी तक चलेगा। 6 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का मुख्य समारोह रात्रि को भव्यता के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्री बंगलाजी मंदिर से श्रीजी की सवारी ब्रह्म चबूतरे से श्री रास मंडल तक जाएगी। रातभर महारास का उल्लास रहेगा। श्रीजी की सवारी पांच दिनों तक रास मंडल में विराजमान रहेगी और गरबा सहित विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
रास उत्सव का महत्व
इस अवसर पर प्रणामी धर्मावलंबी रास उत्सव का आनंद लेते हुए भक्ति रस के अमृत का पान करेंगे। वर्ष में केवल एक बार बंगलाजी मंदिर से अखंड रास के रचइया की सवारी धूमधाम से रास मंडल में लाई जाती है। यहां पांच दिनों तक श्रीजी अपनी सखियों और सुंदरसाथ के साथ रास रमण करते हैं। देश-विदेश से हजारों भक्त इस अद्भुत दर्शन का आनंद उठाते हैं और स्वयं को धन्य मानते हैं।

महामति प्राणनाथ जी और महाराजा छत्रसाल का प्रसंग
ज्ञात हो कि संवत् 1740 में महामति प्राणनाथ जी ने खेजड़ा मंदिर परिसर में बुंदेलखंड की रक्षा के लिए महाराजा छत्रसाल को विजयादशमी के दिन वरदानी तलवार प्रदान की थी। उन्होंने संकल्प कराया था कि विजय प्राप्ति के बाद ही वे लौटेंगे। परिणामस्वरूप महाराजा छत्रसाल ने पूरे बुंदेलखंड पर विजय प्राप्त की और पन्ना को राजधानी बनाया।
400 साल पुरानी परंपरा
पन्ना में शरद पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन पिछले चार सौ वर्षों से निरंतर हो रहा है। कहा जाता है कि प्रथम आयोजन संवत् 1740 में हुआ था, जब महामति प्राणनाथ ने 5 हजार सुंदरसाथ के साथ अखंड रास के दर्शन कराए थे। समय के साथ यह परंपरा और भव्य होती चली गई। अब यह महोत्सव भारत के अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, नेपाल सहित अनेक देशों के भक्तों को आकर्षित करता है।
दस दिवसीय शरद महोत्सव कार्यक्रम 2025
2 अक्टूबर, विजयादशमी (दशहरा)
श्री खेजड़ा मंदिर से शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक मंचीय कार्यक्रम। परंपरानुसार प्रात: पन्ना नरेश छत्रसाल द्वितीय को पान वीरा और तलवार भेंट।
3 अक्टूबर
ब्रह्म चबूतरे पर प्रवचन, वाणी गायन, भजन, रामत, गरबा और रास आदि कार्यक्रम।
4 अक्टूबर
श्रीजी की सवारी श्री खेजड़ा मंदिर से शाम 5 बजे प्रारंभ होकर रात्रि 12 बजे श्री प्राणनाथ जी मंदिर पहुँचेगी।
5 अक्टूबर
निजानंद सद्गुरु धनी श्री देवचन्द्र जी प्रगटन महोत्सव। ब्रह्म चबूतरे पर रात्रि 8 से 11.30 बजे तक मंचीय कार्यक्रम और रात्रि 12 बजे प्राकट्योत्सव।
6 अक्टूबर, शरद पूर्णिमा
सुबह से रातभर मंचीय कार्यक्रम, रास और गरबा। रात्रि 12 बजे श्री बंगलाजी से शोभायात्रा निकलकर रास मंडल पहुंचेगी। सम्पूर्ण रात्रि जागरण।
7 से 9 अक्टूबर
प्रतिदिन ध्यान, वाणी चर्चा, प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष गरबा।
10 अक्टूबर
रास की जागरण, गरबा, रामत और झीलना।
11 अक्टूबर, पंचमी
सुबह 9 बजे श्रीजी की शोभायात्रा रास मंडल से निकलकर पुनः श्री बंगलाजी मंदिर में पहुंचेगी।
रिपोर्ट: राकेश कुमार शर्मा