Jabalpur News: आदिवासी संस्कृति बचाओ यात्रा का तृतीय दिन संपन्न

खेर माता मंदिर, ऋषि नगर में संस्कृति, परंपरा और समस्याओं पर हुई विस्तृत चर्चा

जबलपुर। आदिवासी संस्कृति बचाओ यात्रा का तृतीय दिन कौशल्या गोटिया, पूर्व मंत्री (मध्य प्रदेश शासन) के नेतृत्व में अखिल भारतीय आदिवासी शबरी संघ के तत्वावधान में संपन्न हुआ। यह यात्रा छोटी खैरी, बड़ी खैरी एवं ऋषि नगर के आदिवासी समाज के साथ आयोजित की गई। कार्यक्रम का मुख्य आयोजन ऋषि नगर स्थित खेर माता मंदिर में हुआ, जिसमें तीनों गांवों के महिला, पुरुष एवं बच्चों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

परम्परा का पालन

कार्यक्रम में खेर माता को ग्राम देवी के रूप में स्मरण किया गया। वक्ताओं ने बताया कि खेर माता की उपासना आदिवासी समाज की प्राचीन संस्कृति का अभिन्न अंग है। आज के आयोजन का प्रमुख विषय “गांव बांधना” रहा। यह परंपरा विशेष अवसरों पर गांव के मुखिया एवं खेर माता के पांडा द्वारा निभाई जाती है, जिसमें पूरे गांव की सीमा पर मंत्रोच्चार के साथ गांव बांधा जाता है। आदिवासी समाज की मान्यता है कि इस परंपरा से गांव पर किसी प्रकार की विपत्ति या संकट नहीं आता और समाज की एकता सुदृढ़ रहती है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि चैत्र मास की अष्टमी एवं नवमी के अवसर पर आदिवासी समाज अपने गुप्त देवी-देवताओं की पूजा करता है, जिनका संबंध प्रकृति से होता है। पूर्वजों द्वारा निर्धारित भोग एवं नियमों का आज भी समाज पूरी निष्ठा से पालन करता है। आदिवासी समाज का विश्वास है कि उनके देवी-देवता आज भी उनकी रक्षा करते हैं और प्रत्येक कुल के अपने-अपने कुल देवता होते हैं।

संस्कृति का संरक्षण जरूरी

वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि बदलते समय और शहरीकरण के कारण नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और विरासत से अनभिज्ञ होती जा रही है। इसे सहेजने में आ रही कठिनाइयों पर चर्चा करते हुए कहा गया कि आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए सरकारों को आगे आना होगा, उनके अधिकारों की राशि सही समय पर उन तक पहुंचानी होगी। इन परिस्थितियों में “आदिवासी संस्कृति बचाओ यात्रा” को समाज के लिए अत्यंत कारगर पहल बताया गया।

स्थानीय समस्याओं को लेकर उठी आवाज

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने कई गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। डेयरी फार्म से निकलने वाले गाय-भैंसों के मल-मूत्र के कारण बस्तीवासियों का जीवन दूभर हो गया है। संबंधित डेयरी संचालकों की दबंगई और ऊंची पहुंच के चलते लोग भयभीत हैं।

इसके अलावा क्षेत्र की सड़कें अत्यंत जर्जर हैं, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है। ऋषि नगर स्थित एक शमशान भूमि पर डेयरी मालिक द्वारा कब्जा किए जाने का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया, जिसके कारण अंतिम संस्कार तक में बाधा उत्पन्न हो रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक बताई गई। आदिवासी बच्चों के लिए कोई समुचित शैक्षणिक भवन नहीं है। भारी वाहनों की 24 घंटे आवाजाही के कारण बच्चे सड़क पार कर खैरी नहीं जा पाते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं कच्ची शराब की अवैध बिक्री चरम पर होने से युवाओं में नशे की लत, लड़ाई-झगड़े और अशांति बढ़ रही है। इसका सबसे अधिक असर युवा महिलाओं, छात्राओं और छात्रों पर पड़ रहा है।

कार्यक्रम में रहे उपस्थित

कार्यक्रम में भैयालाल गोटिया, रोशन लाल कोल, रामनरेश कोल, ख्याली सिंह, कुंजीलाल गोटिया, वाल्मीकि कोल, जीतू गोटिया, गणेश गोटिया, रंगलाल खलीफा, उमेश गोटिया, गीता गोटिया, विमल गोटिया, मंजू गोटिया, कल गोटिया, कांटो गोटिया, छोटी बाई, लाल कोल, लव कोल, दीपा कोल, आरती भारती कोल, संतोष गोटिया, अशोक गोटिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में कौशल्या गोटिया, पूर्व मंत्री ने आश्वस्त किया कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और समस्याओं को शासन-प्रशासन तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जाएगा और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

Back to top button