अक्षय तृतीया पर किए गए दान का मिलता है अनंत फल, जानें शुभ मुहूर्त और विशेष योग

जबलपुर। हिंदू पंचांग के मुताबिक वर्ष के दूसरे महीने वैशाख के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अक्षय तृतीया कहलाती है। इस तिथि पर किए गए दान-धर्म का अक्षय यानी कभी नाश न होने वाला फल व पुण्य मिलता है। इसलिए यह सनातन धर्म में दान-धर्म का अचूक काल माना गया है। इसे चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं, क्योंकि यह तिथि 8 चिरंजीवियों में एक भगवान परशुराम की जन्म तिथि भी है।

हिंदू धर्म मान्यताओं में किसी भी शुभ काम के लिए साल के स्वयं सिद्ध मुहूर्तों में आखा तीज भी एक है। भगवान विष्णु के नर-नरायण, हयग्रीव और परशुराम अवतार हुए थे। इसलिए इस दिन परशुराम जयंती, नर-नारायण जयंती भी मनाई जाती है। यह कहना है ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे का।

अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त और तिथि

पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि त्रेतायुग की शुरुआत भी इसी शुभ तिथि से मानी जाती है। इस वर्ष तृतीया तिथि का प्रारंभ रविवार 19 अप्रैल 2026 को दोपहर 1:06 से होगा, जिसका समापन 20 अप्रैल सोमवार को दिन में 10:44 तक रहेगा।

अतः 19 अप्रैल को तृतीया तिथि में परशुराम प्रकटोत्सव मनाया जाएगा और 20 अप्रैल को रोहिणी नक्षत्र में अक्षय तृतीया का पर्व रहेगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का विशेष सहयोग प्रातः 7:40 से प्रारंभ होगा। इसी दिन सौभाग्य योग, स्थिर योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग भी रहेंगे।

ग्रहों की स्थिति से बन रहा विशेष संयोग

इस तिथि पर सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी उच्च शक्ति में होते हैं। सूर्य मेष राशि में (उच्च) और चंद्रमा वृषभ राशि में (उच्च) स्थित रहते हैं। इस कारण सृष्टि में सकारात्मक ऊर्जा चरम पर होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस अक्षय तृतीया पर सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशि में रहेंगे, वहीं शुक्र के स्वराशि में होने से विशेष शुभ संयोग बन रहा है। इसके साथ ही इस बार 6 राजयोग भी बन रहे हैं, जिससे यह पर्व और भी खास हो गया है।

मांगलिक कार्यों के लिए शुभ दिन

इस दिन विवाह, कारोबार की शुरुआत और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य बहुत शुभ माने जाते हैं। जिन लोगों के विवाह में मुहूर्त या ग्रह-नक्षत्रों की बाधा आती है, वे भी इस दिन सूर्य पूजन (लाल दान) और गुरु पूजन (पीला दान) कर निर्विघ्न विवाह कर सकते हैं।

अक्षय तृतीया पर दान का विशेष महत्व

अक्षय तृतीया पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जल से जुड़े पात्र जैसे गिलास या घड़ा दान करना चाहिए। गर्मी के मौसम में शीतल वस्तुओं का दान अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

गुड़ का दान करें या जल में गुड़ मिलाकर गाय को पिलाएं। मीठी रोटी बनाकर गाय को खिलाना भी शुभ माना गया है।

जौ खरीदकर भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें और पूजा के बाद उसे लाल वस्त्र में लपेटकर तिजोरी में रखें। जौ को कनक यानी सोने के समान माना गया है।

अन्न दान का मिलता है अनंत फल

अक्षय तृतीया पर अन्न दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन किए गए दान का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। इसलिए जरूरतमंदों को चावल, आटा या अन्य अनाज दान करना चाहिए।

सिद्धांत शास्त्र में कहा गया है — “अस्यां तिथौ कृतं दानं अक्षयं भवति” अर्थात इस दिन किया गया दान कभी समाप्त नहीं होता।

मान्यता है कि इस दिन माता अन्नपूर्णा की विशेष कृपा रहती है। अन्न, जल और गौदान का फल अनंत होता है। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में नई फसल का पूजन भी किया जाता है।

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