
जबलपुर। 18 धरोहरों के साथ वैश्विक नक्शे पर जबलपुर चमक रहा है। यूनेस्को की विश्व धरोहर की टेंटिटिव सूची में नाम दर्ज करने के बाद लमेटा घाट, जबलपुर की चर्चा दुनिया भर में है। यहां पृथ्वी के सबसे प्राचीन समय की चट्टानें आज भी दमक रही हैं। इस बार विश्व धरोहर दिवस, विरासतों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज इन धरोहरों में बीते अतीत की कहानियां छपी हैं। भारत के मानचित्र के मध्य में बसा मध्य प्रदेश केवल भौगोलिक रूप से ही “हार्ट ऑफ इंडिया” नहीं है, बल्कि इसकी आत्मा में इतिहास की गहरी धड़कन बसती है।

विश्व धरोहरों में मध्य प्रदेश की मजबूत पहचान
दुनिया पहले से ही राज्य के 3 यूनेस्को-मान्यता प्राप्त अजूबों का जश्न मनाती है—खजुराहो के स्मारक समूह, जो अपनी नागर शैली के मंदिरों और मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है। वहीं सांची के बौद्ध स्मारक, जहां बौद्ध वास्तुकला और दर्शन के प्रकाश स्तंभ के रूप में खड़ा है और भीमबेटका मानव रचनात्मकता की सबसे शुरुआती अभिव्यक्तियों को दर्शाती है।
टेंटिटिव सूची में शामिल 15 नई धरोहरें
इन विश्व-प्रसिद्ध प्रतीकों से परे, राज्य की 15 अन्य धरोहरें अब यूनेस्को की अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल होकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं।
सबसे पहले है लमेटा घाट और भेड़ाघाट, जहां डायनासोर युग से भी प्राचीन चट्टानें मौजूद हैं। विशेषज्ञों का दल अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप चुका है।
इसके अलावा ग्वालियर किला, मांडू, चंदेरी, ओरछा और भोजेश्वर मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थल भी इस सूची में शामिल हैं, जो अपनी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं।
अन्य प्रमुख स्थल जो सूची में शामिल
चंबल घाटी की रॉक आर्ट साइट
सतधारा के बौद्ध स्मारक
कुंडी भंडारा, बुरहानपुर
चौंसठ योगिनी मंदिर
गोंड स्मारक, मंडला
धमनार गुफाएं, मंदसौर
अशोक के शिलालेख
गुप्तकालीन मंदिर (सांची, उदयगिरि, नचना, तिगवा, भूमरा, सकोर, देवरी, पवाया)
बुंदेला काल के किला-महल
विरासत से विकास की ओर बढ़ते कदम
इन विरासतों के विकास और संरक्षण के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड (MPTB) द्वारा हेरिटेज सर्किट, पर्यटक सुविधाओं और संरक्षण योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
अमरकंटक में ‘प्रशाद योजना’ के तहत ₹49.98 करोड़ से विकास कार्य किए गए हैं। ग्वालियर किले के संरक्षण के लिए 10 वर्षीय परियोजना शुरू की गई है।
ग्वालियर के फूलबाग क्षेत्र को ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के तहत ₹16.72 करोड़ से विकसित किया जा रहा है। वहीं चित्रकूट में ₹27.21 करोड़ की लागत से घाट, आरती प्लेटफॉर्म और डिजिटल रामायण की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
ओरछा और मांडू को भी ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना के तहत करोड़ों की लागत से विकसित किया जा रहा है।
श्री राम वन गमन पथ: आस्था और पर्यटन का संगम
राज्य सरकार ने ‘श्री राम वन गमन पथ’ हेरिटेज सर्किट की शुरुआत की है, जो 9 जिलों के 23 स्थलों को जोड़ता है। इसका केंद्र चित्रकूट और अमरकंटक हैं। यह केवल पर्यटन नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति की यात्रा है।
नया विजन: जीवंत विरासत का अनुभव
मध्य प्रदेश अब केवल स्मारकों का संग्रह नहीं, बल्कि एक ऐसा स्थान बन रहा है जहां इतिहास, संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
“हमारी विरासतें केवल संरक्षित स्मारक नहीं, बल्कि जीवंत अनुभव हैं। मध्य प्रदेश एक ऐसा संगम है, जहां इतिहास, संस्कृति और प्रकृति एक-दूसरे में गहराई से गुंथे हुए हैं।”
— डॉ. इलैयाराजा टी., सचिव, पर्यटन एवं प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड