वर्तिका काव्य गोष्ठी में गूंजा साहित्य का स्वर, समाज के मार्गदर्शन पर मंथन

जबलपुर। वर्तिका की मासिक काव्य गोष्ठी नूतन मराठी स्कूल, गोलबाजार में वरिष्ठ समाजसेवी प्रकाश दुबे की अध्यक्षता तथा वसंत शर्मा एवं सुवीर श्रीवास्तव के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित हुई। कार्यक्रम में साहित्यकारों एवं कवियों ने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए काव्य पाठ से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

साहित्य हर युग में समाज का मार्गदर्शक

अतिथियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य हर काल में समाज का मार्गदर्शक रहा है। किसी भी राष्ट्र और सभ्यता की पहचान उसके साहित्य से होती है। साहित्य समाज की आत्मा है, जो सदैव अजर-अमर रहती है और नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करती है।

काव्य पटल का हुआ अनावरण

इस अवसर पर विजय विश्वकर्मा एवं संतोष नेमा ‘संतोष’ के काव्य पटल का अनावरण किया गया। संयोजक विजय नेमा ‘अनुज’ ने वर्तिका संस्था की पिछले 35 वर्षों की साहित्यिक यात्रा एवं आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि संस्था ने हमेशा नवोदित साहित्यकारों को मंच देकर प्रोत्साहित किया है।

संस्कारधानी की साहित्यिक परंपरा पर चर्चा

राजेश पाठक ‘प्रवीण’ सहित अन्य वक्ताओं ने जबलपुर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कारधानी ने देश-विदेश में अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं, जिन्होंने शहर का नाम गौरवान्वित किया है। कार्यक्रम में अतिथि स्वागत महेश स्थापक ने किया। सरस्वती वंदना सुभाषमणि बैरागी ने प्रस्तुत की। संचालन विनीता पैगवार ‘विधि’ तथा आभार प्रदर्शन रजनी कोठारी ने किया।

काव्य पाठ ने बांधा समां

कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने कविता, गीत, ग़ज़ल एवं अन्य विधाओं की रचनाओं का पाठ किया। “यह प्रश्न जरूरी था, उत्तर भी जरूरी है, क्या विधवा नारी की पहचान जरूरी है”, “आओ अब इंसान बने हम, मानवता की आन बने हम”, “जिनकी आँखों में ख्वाब होते हैं, वो बड़े लाजवाब होते हैं” तथा “गुड़ से गुरुरी ये बुंदेली यार” जैसी रचनाओं को श्रोताओं ने खूब सराहा।

बड़ी संख्या में साहित्यकार रहे उपस्थित

गोष्ठी में निर्मला तिवारी, हीराधर बड़गईयां, सुशील जैन, जयप्रकाश श्रीवास्तव, दीनदयाल तिवारी, सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’, सोहन सलिल, ज्योति प्यासी, प्रिन्सी पाटकर, खुशी सेन, निर्मला श्रीवास्तव, कालीदास ताम्रकार, मनोज जैन, वंदना सोनी, विजय बेशर्म, प्रभा श्रीवास्तव ‘बच्चन’, डॉ. अनिल कोरी, तरुणा खरे, प्रतीक्षा सेठी, युनुस अदीब, कुंजीलाल चक्रवर्ती, अनुराधा गर्ग सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी सहभागिता दी।

वर्तिका संस्था के अध्यक्ष संतोष नेमा ‘संतोष’ ने बताया कि कार्यक्रम में मंजू इंगले, अमित बाबा, दिवाकर शर्मा, अनिल विश्वकर्मा, आर.के. पासी, शेखर शर्मा, बच्चन श्रीवास्तव, विजय सिन्हा, रमाकांत गौतम, सुनील तोमर एवं विनोद विश्वकर्मा सहित अनेक साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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