Chaitra Navratri 2026: पालकी पर सवार होकर आएंगी मातारानी, जानिए शुभ मुहूर्त और योग

जबलपुर। इस वर्ष बासन्तेय नवरात्र का प्रारंभ गुरुवार 19 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हो रहा है। नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च गुरुवार से होने जा रही है। चैत्र नवरात्रि का आरंभ हर साल चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि से होता है। अमावश्या तिथि प्रातः 6:42 तक रहेगी और प्रतिपदा तिथि 19 मार्च की रात्रि 5:44 तक रहेगी अतः नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से एवं संवत्सर का शुभारंभ 20 मार्च से होगा। इस साल चैत्र नवरात्रि पर कई शुभ योग रहने वाला है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि नवरात्रि में इस बार 4 राजयोग का संयोग रहने वाला है। साथ ही इस दिन सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग दोनों का शुभ संयोग रहेगा।

घट, कलश एवं जवारा स्थापना मुहूर्त

प्रातः 6:43 से प्रातः 9:02 तक।
प्रातः 10:00 से दोपहर 1:19 तक।
दोपहर 3:2 से शाम 5:41 तक।
शाम 6:17 से रात्रि 8:52 तक।

माता के आगमन और गमन की सवारी का महत्व

19 मार्च से 27 मार्च तक पूरे 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाएगी। नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा जिनती महत्ता रखती है। मां का आगमन और गमन की सवारी का भी उतना ही महत्व है। इस वर्ष भगवती का आगमन और गमन दोनों ही शुभ संकेत दे रहे हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि में माता रानी की सवारी पालकी है। इतना ही नहीं धर्म शास्त्रों के मुताबिक पालकी को समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यह देश और देशवासियों के जीवन में शांति और समृद्धि लाएगी।

अगर नवरात्रि की शुरूआत गुरुवार के दिन होती है तो मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आती हैं। इसके अलावा 27 मार्च को शुक्रवार के दिन नवरात्रि का समापन होगा। इसके बाद माता रानी हाथी पर प्रस्थान करेंगी। माता का हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करना शुभ संकेत माना जाता है। सुख व सौभाग्य की वृद्धि करती हैं। इसका असर राष्ट्र पर भी होता है। राष्ट्र में सुख समृद्धि और मान-प्रतिष्ठा की वृद्धि होगी। इस चैत्र नवरात्र चतुर्थी तिथि का क्षय हो रहा है। सभी 9 दिन मां देवी को समर्पित है।

नवरात्रि के शुभ योग

चैत्र नवरात्रि इस बार 9 दिनों की होगी। इस बार 2 सर्वार्थ सिद्धि, 2 रवि योग, दो अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है।

विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ

विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ शुक्रवार 20 मार्च 2026 से होगा। इस वर्ष “रौद्र” नाम संवत्सर रहेगा। पूरे वर्ष में किए जाने वाले पूजन अनुष्ठान यज्ञादि में उपयोग होने वाले संकल्प में रौद्र नाम संवत्सर का ही प्रयोग किया जाएगा। इस वर्ष का राजा गुरु है और मंत्री मंगल रहेगा। वर्ष प्रवेश कुंडली मीन लग्न से प्रारंभ हो रही है और इस वर्ष के 7 विभाग शुभ ग्रहों को प्राप्त हो रहे है तथा 3 विभाग पाप ग्रहों को मिल रहे है।

अतः इस वर्ष देश में अनेक कठिनाइयों के बाद भी सामान्य खुशहाली रहेगी, आधुनिकता के साथ-साथ सनातन परंपराओं का भी अभ्युदय होगा। सामरिक भंडारण और मशीनरी संयंत्रों में भी कई नवीन नीतियां बनेगी जिससे देश का विकास होगा। औद्योगिक क्षेत्रों में रफ्तार मिलेगी। धन-धान्य और व्यवसाय में वृद्धि होती जाएगी।

दक्षिण पश्चिम के राज्यों में प्राकृतिक प्रकोप, अतिवृष्टि, भूकंप और तूफान से नुकसान होगा। मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अतिवर्षा का प्रभाव कृषि संबंधी परेशानी एवं नुकसान की स्थिति बनेगी। गेहूं, मसूर, चावल, हल्दी, नारियल आदि में तेजी होगी। सभी राज्यों में वर्षा का प्रभाव अच्छा रहेगा।

परंतु कही-कही कम वर्षा और पर्वतीय उत्तरी भागों में अधिक वर्षा भूस्खलन की संभावनाएं अधिक रहेंगी। शीतकालीन फसल में वृद्धि होगी। पश्चिम के भाग में फसलों को नुकसान हो सकता है। अनाज का भाव सम रहेगा। पीले, लाल और सफेद रंग की वस्तुओं में गिरावट आएगी। फसलों में वृद्धि होगी। प्रॉपर्टी, सीमेंट, लोहा एवं धातुओं में तेजी रहेगी। शेयर बाजार में अस्थिरता रहेगी अतः सावधानी रखना चाहिए, वर्ष के उत्तरार्ध में तेजी का रुख रहेगा।

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