
जबलपुर। भगवान को पाने की भावना भक्त में जन्म के साथ ही होती है। मां के गर्भ से ही भक्त का चिंतन भगवान की ओर होता है, लेकिन जब वह संसार में आता है तो सांसारिक जीवन की व्यस्तताओं में उलझकर हरिनाम का स्मरण भूल जाता है। जीवन की इस दौड़ में मनुष्य हरिनाम जपना छोड़कर मोह-माया के जाल में फँस जाता है।
हरिनाम से मिलता है मोक्ष और जीवन का सार
जगद्गुरु डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज ने कहा कि जैसे श्रीकृष्ण ने सुदामा का उद्धार किया, वैसे ही हरि स्मरण और नामजप करने वाला भक्त कभी अधोगति को प्राप्त नहीं होता। विभीषण ने आसुरी शक्तियों के बीच रहकर भी राम नाम को सुखदाई मानकर निरंतर जप किया और अंततः मोक्ष प्राप्त किया। इसी प्रकार हरिनाम जीवन के हर क्षण में आत्मा को पवित्र करता है और मोक्ष का मार्ग दिखाता है।

गुरुवचनों पर विश्वास और समर्पण ही साधना का आधार
महाराजश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि गुरु वचनों में विश्वास, दीनता का भाव, मन के दोषों पर विजय, गुरु के प्रति समर्पण और चित्त की एकाग्रता से ज्ञान प्राप्त होता है। यही ज्ञान जीवन में सार्थक होता है और मानव को सांसारिक बंधनों से मुक्त करता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गुरु में पूर्ण आस्था रखता है और उनके उपदेशों पर चलता है, वही वास्तविक ज्ञान प्राप्त करता है।
पुण्य कर्मों से बढ़ती है विवेक-बुद्धि
जगतगुरु जी ने आगे कहा कि बार-बार पुण्य कर्म करने से मनुष्य की विवेक-बुद्धि बढ़ती है। जिस व्यक्ति की विवेक-बुद्धि निरंतर बढ़ती रहती है, वह सदैव आगे रहता है। ऐसा व्यक्ति न केवल धर्म प्राप्त करता है, बल्कि धन और सम्मान दोनों ही उसकी ओर आकर्षित होते हैं।

श्रीमद् भागवत महापुराण के सप्तम दिवस पर प्रवचन
यह प्रवचन श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस पर हुआ, जिसमें श्रीकृष्ण-सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष कथा का वाचन किया गया। इस दौरान भक्तों ने भाव-विभोर होकर हरिनाम का संकीर्तन किया और गुरुचरणों में अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
व्यास पीठ पूजन एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति
व्यास पीठ का पूजन श्रद्धाभाव से श्रीमती कमलेश शुक्ल, शैलेन्द्र ज्योतिषी, सुनित श्रद्धा वंदना द्वारा किया गया। इस अवसर पर अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक शर्मा, संदीप जैन गुड्डा, एड. मनीष शर्मा, डॉ. हितेश अग्रवाल, विष्णु पटेल, विध्येश भापकर, संजय पटेल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। वातावरण में हरिनाम का गुंजायमान स्वर सभी के हृदयों को भक्ति से भर गया।
कार्यक्रम के समापन पर महाराजश्री ने कहा कि हरिनाम ही वह साधन है, जो संसार के बंधनों से मुक्त करता है। मनुष्य यदि प्रतिदिन कुछ क्षण भी हरि स्मरण में लगाए तो उसका जीवन धन्य हो जाता है।
नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में श्रीमद् भागवत महापुराण प्रारंभ आज से
श्रीहरि नारायण के परम प्रिय मार्गशीर्ष मास के अवसर पर श्रीमद् जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंहदेवाचार्य जी महाराज के मुखारविंद से दिनांक 10 नवंबर से 16 नवंबर तक सायं 3 बजे से सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन श्री नृसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज जबलपुर में किया गया है।
भागवत कथा के प्रथम दिवस दोपहर 2.30 बजे शोभायात्रा श्री नृसिंह भगवान का पूजान पूज्य गुरुदेव भगवान के श्री विग्रह का पूजन अर्चन करके कथा मंच के लिए प्रस्थान करेगी। श्रीमद् भागवत महापुराण श्रवण करने का सभी भक्त को आमंत्रित किया है, लालमन मिश्र, रामजी पुजारी, ब्रह्मचारी हिमांशु, उमेश तिवारी, राजेश तिवारी सहित नरसिंह मंदिर गीता धाम भक्त मंडल ने की है।